बेंगलुरु। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने सोमवार को अपने मंत्रिमंडल का बड़ा विस्तार करते हुए 20 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। बेंगलुरु स्थित लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सभी नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, विधायक और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कांग्रेस हाईकमान की मंजूरी के बाद हुए इस कैबिनेट विस्तार को राज्य की राजनीति में अहम कदम माना जा रहा है। नई टीम में जहां 12 नए चेहरों को पहली बार मंत्री बनने का अवसर मिला है, वहीं 8 अनुभवी नेताओं की दोबारा मंत्रिमंडल में वापसी हुई है। पार्टी ने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की भी कोशिश की है।
20 नेताओं ने संभाली मंत्री पद की जिम्मेदारी
कैबिनेट विस्तार में जिन नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, उनमें पीएम नरेंद्रस्वामी, शिवराज तंगडगी, रुद्रप्पा लामाणी, के.एस. बसवन्थप्पा, बी. नागेंद्र, टी. रघुमूर्ति, बी.जेड. ज़मीर अहमद खान, रिजवान अरशद, संतोष लाड, मधु बंगारप्पा, पुट्टरंगशेट्टी, एस.एस. मल्लिकार्जुन, अजय सिंह, एन. चलुवरायस्वामी, के.एम. शिवलिंगे गौड़ा, एच.सी. बालकृष्ण, गायत्री शांतिगौड़ा, बसवराज रायारेड्डी, विजयानंद काशप्पनावर और लक्ष्मण सावदी शामिल हैं।इन मंत्रियों को जल्द ही विभागों का आवंटन किया जाएगा, जिसके बाद नई टीम प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालेगी।
नए और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन
कांग्रेस ने इस विस्तार में नए और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन बनाने की रणनीति अपनाई है। 12 नए चेहरों को पहली बार मंत्री बनने का अवसर दिया गया है, जबकि कई ऐसे नेताओं की भी वापसी हुई है जो पहले सरकार में मंत्री रह चुके हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों और संगठनात्मक मजबूती को ध्यान में रखते हुए यह विस्तार किया गया है, ताकि सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर बेहतर समन्वय बनाया जा सके।
महिला प्रतिनिधित्व सीमित
20 सदस्यीय मंत्रिमंडल विस्तार में गायत्री शांतिगौड़ा को एकमात्र महिला मंत्री के रूप में शामिल किया गया है। महिला प्रतिनिधित्व को लेकर विपक्ष सवाल उठा सकता है, हालांकि कांग्रेस का कहना है कि भविष्य में संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर महिलाओं को और अवसर दिए जाएंगे।
वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारियां बरकरार
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार में पहले से कार्यरत कई वरिष्ठ नेता अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते रहेंगे। इनमें जी. परमेश्वर, के.एच. मुनियप्पा, के.जे. जॉर्ज, एम.बी. पाटिल, रामलिंगा रेड्डी, सतीश जारकीहोली, कृष्णा बायरे गौड़ा, प्रियंक खरगे, यू.टी. खाडेर, ईश्वर खंड्रे, डॉ. यतिंद्र सिद्धारमैया, बायराथी सुरेश और शरण प्रकाश पाटिल जैसे नेता शामिल हैं।सरकार का कहना है कि अनुभवी और नए मंत्रियों का यह संयोजन प्रशासनिक कार्यों को और प्रभावी बनाएगा।
विधानमंडल के प्रमुख पदों पर भी नियुक्तियां
कैबिनेट विस्तार के साथ कांग्रेस हाईकमान ने विधानसभा और विधान परिषद के प्रमुख पदों पर भी नियुक्तियों को मंजूरी दी है।
जी.एस. पाटिल को विधानसभा अध्यक्ष
ए.एस. पोनन्ना को उपाध्यक्ष
सलीम अहमद को विधान परिषद का सभापति
उमाश्री को उपसभापति
इन नियुक्तियों को भी संगठनात्मक संतुलन और प्रशासनिक मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री बोले— सभी को एक साथ मंत्री बनाना संभव नहीं
कैबिनेट विस्तार से पहले मंत्री पद नहीं मिलने को लेकर कुछ विधायकों की नाराजगी की खबरें सामने आई थीं। इस पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि सभी विधायकों को एक साथ मंत्रिमंडल में शामिल करना संभव नहीं है।उन्होंने कहा कि सरकार योग्य और मेहनती विधायकों को चरणबद्ध तरीके से अवसर देगी। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि वह स्वयं भी पहले कार्यकाल में शुरुआत में मंत्री नहीं बन पाए थे, लेकिन बाद में उन्हें जिम्मेदारी मिली थी। इसलिए किसी को निराश होने की आवश्यकता नहीं है।
नए मंत्रियों ने जताया आभार
मंत्री पद की शपथ लेने के बाद कई नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया।एन. चलुवरायस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान ने उन पर भरोसा जताया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि उन्हें जो भी विभाग मिलेगा, उसकी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाएंगे।वहीं पीएम नरेंद्रस्वामी ने मंत्री बनने पर खुशी जताते हुए कहा कि पूरी टीम मिलकर राज्य में कांग्रेस संगठन को और मजबूत करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि पार्टी 2028 के विधानसभा चुनाव में फिर सरकार बनाएगी और 2029 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन करेगी।