इस बार लोकसभा चुनाव में बिहार की पूर्णिया सीट सबसे ज्यादा चर्चा में रही। यहां दूसरे चरण में 26 अप्रैल को वोटिंग हुई। राज्य की अधिकतर सीटों पर आइएनडीआइए और एनडीए के बीच सीधी टक्कर है, लेकिन पूर्णिया सीट की स्थिति काफी अलग रही। पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। उन्होंने बाकी पार्टियों के समीकरण को बिगाड़ दिया है। चुनाव से पहले पप्पू यादव ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था, लेकिन उन्हें पार्टी से टिकट नहीं मिला। हालांकि उनका दावा है कि कांग्रेस का समर्थन उन्हें हासिल है।
इस बार लोकसभा चुनाव में बिहार की पूर्णिया सीट सबसे ज्यादा चर्चा में रही। यहां दूसरे चरण में 26 अप्रैल को वोटिंग हुई। राज्य की अधिकतर सीटों पर आइएनडीआइए और एनडीए के बीच सीधी टक्कर है, लेकिन पूर्णिया सीट की स्थिति काफी अलग रही। पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। उन्होंने बाकी पार्टियों के समीकरण को बिगाड़ दिया है। चुनाव से पहले पप्पू यादव ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था, लेकिन उन्हें पार्टी से टिकट नहीं मिला। हालांकि उनका दावा है कि कांग्रेस का समर्थन उन्हें हासिल है।
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