भू-राजनीतिक हालात में आए एक बड़े बदलाव के तहत, बोइंग ने चीन के बजाय भारत में अपनी इंजीनियरिंग भर्ती को काफी बढ़ा दिया है। अमेरिका की बढ़ती भू-राजनीतिक चिंताओं और चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। हांगकांग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की 1 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, बोइंग भारत में चीन की तुलना में करीब 20 गुना अधिक इंजीनियरों की भर्ती कर रहा है। 31 जुलाई तक, बोइंग की करियर वेबसाइट पर चीन में सिर्फ पाँच नौकरियों के अवसर थे, जिनमें से तीन इंजीनियरिंग से संबंधित थे।
वहीं, भारत में 83 नौकरियों के अवसर थे, जिनमें से 58 इंजीनियरिंग के पदों के लिए थे। यह असमानता पिछले कुछ हफ्तों से स्थिर बनी हुई है। बोइंग के मौजूदा आंकड़े इस बदलाव को और स्पष्ट करते हैं। कंपनी के चीन में करीब 2,200 कर्मचारी हैं, जबकि भारत में 6,000 से अधिक लोग काम कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि भारत का वाणिज्यिक विमानन बेड़ा चीन के आकार का सिर्फ छठा हिस्सा है। बोइंग के चीन के साथ ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
भू-राजनीतिक हालात में आए एक बड़े बदलाव के तहत, बोइंग ने चीन के बजाय भारत में अपनी इंजीनियरिंग भर्ती को काफी बढ़ा दिया है। अमेरिका की बढ़ती भू-राजनीतिक चिंताओं और चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।
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