केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नशे के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि ड्रग्स बनाने और बेचने वालों के प्रति किसी भी तरह की दया नहीं बरती जानी चाहिए। उन्होंने यह बात नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 9वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।
यह एक सोचा-समझा षड्यंत्र है
भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता अमित शाह ने नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की बैठक में स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह नार्को-टेरर से जुड़ी एक गंभीर राष्ट्रीय चुनौती है। केंद्रीय गृहमंत्री ने आगे कहा कि यह एक सोचा-समझा षड्यंत्र है, जिसका उद्देश्य देश की आने वाली पीढ़ियों को बर्बाद करना है।
केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नशे के खिलाफ प्रभावी लड़ाई के लिए भारत सरकार के सभी विभागों को 2029 तक का स्पष्ट रोडमैप तैयार करना चाहिए और उसके क्रियान्वयन के लिए समयबद्ध समीक्षा प्रणाली विकसित करनी होगी। भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता ने इस दौरान जोर देकर कहा कि इस अभियान में केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है।
ड्रग्स बनाने और बेचने वालों के प्रति कोई दया नहीं होनी चाहिए
इस दौरान अमित शाह ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि भारत सरकार की अप्रोच बिल्कुल साफ है-ड्रग्स बनाने वाला हो या बेचने वाला, दोनों के प्रति कोई दयाभाव नहीं रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि नशे के कारोबार से जुड़े किंगपिन, फाइनेंसर और लॉजिस्टिक नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई की जाए और इसे नियमित समीक्षा का हिस्सा बनाया जाए।
नशे के खिलाफ सभी एजेंसियां एक साथ काम करेंगी
उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के अधिकतम उपयोग, समय पर चार्जशीट दाखिल करने और मामलों में सजा की दर बढ़ाने को भी सरकार के प्रमुख लक्ष्यों में शामिल किया जाना चाहिए। अमित शाह ने विश्वास जताया कि यदि सभी एजेंसियां एकजुट होकर रणनीतिक तरीके से काम करें, तो भारत नशे के खिलाफ इस लड़ाई में निर्णायक सफलता हासिल कर सकता है।
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