भारत सरकार ने गेहूं और धान की सरकारी खरीद में शामिल आढ़तियों और सहकारी समितियों के कमीशन की दरों में बदलाव को मंजूरी दे दी है। यह नई दरें रबी विपणन सत्र (RMS) 2026-27 से लागू होंगी।
कैसे मिलता है कमीशन
मौजूदा व्यवस्था के तहत, सरकार की ओर से खरीद प्रक्रिया में मध्यस्थता और अनाज एकत्रीकरण का काम करने वाली सहकारी संस्थाओं, समितियों, उप-एजेंटों और आढ़तियों को कमीशन दिया जाता है।
समिति की सिफारिश के बाद फैसला
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने बताया कि विभिन्न राज्यों से मिले प्रस्तावों के आधार पर एक उप-समिति गठित की गई थी। इसमें भारतीय खाद्य निगम, राज्य सरकारों और विभाग के प्रतिनिधि शामिल थे। समिति ने मौजूदा दरों की समीक्षा कर संशोधन की सिफारिश की।
नई दरें क्या होंगी
- सरकार के फैसले के बाद आढ़तियों के कमीशन में बढ़ोतरी की गई है:
- पंजाब और हरियाणा में गेहूं पर कमीशन ₹46 से बढ़कर ₹50.75 प्रति क्विंटल
- राजस्थान में गेहूं पर ₹41.40 से बढ़कर ₹45.67 प्रति क्विंटल
- धान पर कमीशन ₹45.88 से बढ़कर ₹50.61 प्रति क्विंटल
सहकारी समितियों को भी लाभ
- सहकारी समितियों के कमीशन में भी इजाफा किया गया है:
- गेहूं: ₹27 से बढ़कर ₹29.79 प्रति क्विंटल
- धान: ₹32 से बढ़कर ₹35.30 प्रति क्विंटल
साइलो खरीद पर अलग नियम
आधुनिक साइलो में की जाने वाली खरीद के लिए कमीशन मंडी दरों का 50% ही रहेगा, जैसा कि मौजूदा नीति में प्रावधान है।
बदलाव का उद्देश्य
कमीशन दरों में यह संशोधन खरीद प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने और इसमें शामिल एजेंसियों को बेहतर सहयोग देने के उद्देश्य से किया गया है।
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