अमेरिका से वापस भेजे गए भारतीयों के मामले में विदेश मंत्रालय भी सक्रिय हो गया है। मंत्रालय की टीम ने कुरुक्षेत्र पहुंचकर मामले की पड़ताल की।टीम ने करीब तीन घंटे तक परसू राम कॉलोनी के रहने वाले परमजीत व जोगना खेड़ा गांव के विकास के घर पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी ली। साथ ही संबंधित थाना प्रभारी और पुलिस अधीक्षक से भी चर्चा की। अमेरिका से 104 लोगों को डिपोर्ट किया गया था। उनमें कुरुक्षेत्र के 14 लोगों की सूची पुलिस प्रशासन के पास पहुंची थी। इनमें अभी तक दो लोगों ने ही पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई है।
विदेश मंत्रालय की टीम सबसे पहले परमजीत के पास पहुंची, जहां करीब आधा घंटा तक विस्तार से जानकारी ली उसके द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत की कॉपी भी ले ली। टीम ने परमजीत के साथ उसके परिजनों से भी पूरे मामले पर चर्चा की। इसके बाद टीम थाना केयूके में ही जोगनाखेड़ा के विकास से मिली। टीम ने विकास से जाना कि किस तरह एजेंट ने उन्हें फंसाया और उन्हें रास्ते में क्या-क्या प्रताड़ना झेलनी पड़ी। बाद में टीम ने पुलिस अधीक्षक वरुण सिंगला से भी उनके कार्यालय में चर्चा की। टीम संभवतः प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इस तरह के मामलों की जांच करने के लिए पीड़ितों से मुलाकात करेगी। इसके बाद एक रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी जाएगी।
सपने दिखाने वाले एजेंट ने पहचानने से ही कर दिया इनकार
विकास कुमार ने विदेश मंत्रालय की टीम को दी शिकायत में बताया कि अमित पंजेटा लोगों को विदेश भेजने का काम करता है। उसने 40 लाख रुपये में अमेरिका भेजने का सौदा तय किया था। 29 जुलाई को उसे चेक गणराज्य भेजा तो अगले दिन स्पेन मैडरिड भेज दिया, जहां होटल में 15-16 दिन रहा। इसके बाद उसे मैक्सिको का भरोसा देकर ब्राजील भेज दिया और फोन पर संपर्क करना बंद कर दिया। जब वह ब्राजील के जंगल में फंसा तो वहां से पाकिस्तानी डोंकर को अलग से रुपये दिए और किसी तरह अमेरिका तक पहुंचा। इस बीच उसके करीब पांच से छह माह लग गए। गत 15 जनवरी को ही वह अमेरिका पहुंचा। विकास ने बताया की करीब 40 लाख खर्च हुए तो करीब छह माह तक प्रताड़ना भी झेली। वहीं वापस लौटने पर एजेंट को कॉल की तो उसने पहचानने से भी इन्कार कर दिया।
एक-दूसरे को देख डंकी रूट के फेर में फंसे युवा, बढ़ी संख्या
युवा विदेश में जाकर डॉलर कमाने की चाह में अपनी जमा पूंजी के साथ घर और जमीन तक बेचने को तैयार हैं। डंकी के रास्ते अमेरिका समेत दूसरे देशों में जाने वाले युवाओं की संख्या एक दूसरे को देखकर लगातार बढ़ती जा रही है। इसी के साथ उनके साथ धोखाधड़ी के मामले भी बढ़ रहे हैं। बात 2024 की करें तो एक साल में पुलिस के पास कबूतरबाजी के 35 मामले पहुंचे।
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