चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (CJI) संजय सूर्यकांत ने न्याय प्रणाली को अधिक सुलभ, व्यावहारिक और मानवीय बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्याय केवल कानूनी रूप से सक्षम या शक्तिशाली लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे समाज के हाशिए पर पड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना चाहिए।
न्याय प्रणाली मानवीय और सुलभ हो
CJI सूर्यकांत ने यह बात कॉमनवेल्थ ज्यूडिशियल एजुकेटर्स (CJE) की 11वीं द्विवार्षिक बैठक में कही। उन्होंने न्यायिक नेतृत्व को केवल प्रशासनिक अधिकार या पदानुक्रम तक सीमित न रखकर इसे बौद्धिक और नैतिक दृष्टिकोण के रूप में अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि, प्रक्रियात्मक जटिलता उन लोगों के लिए बाधा नहीं बननी चाहिए जिन्हें सुरक्षा की आवश्यकता है। अदालतों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि न्याय प्रणाली मानवीय और सुलभ हो।
तकनीक और न्याय का संतुलन
CJI ने न्याय प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि AI को केवल न्यायिक तर्क में मदद करनी चाहिए, न्याय का स्थान नहीं लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मुकदमेबाजी-केंद्रित मॉडल से अब न्याय-केंद्रित इकोसिस्टम की ओर बदलाव हो रहा है, जिसमें मध्यस्थता, सुलह और विशेष अदालतों की भूमिका बढ़ रही है। उन्होंने जोर दिया कि न्याय केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक और समयबद्ध होना चाहिए, जो वादियों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील हो।
न्यायिक नेतृत्व में विनम्रता का महत्व
CJI सूर्यकांत ने न्यायिक नेतृत्व में विनम्रता की अहमियत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि सबसे प्रभावशाली नेता वे नहीं होते जो खुद को दोषमुक्त दिखाते हैं, बल्कि वे होते हैं जो अपनी सीमाओं और गलतियों की संभावना के प्रति सचेत रहते हैं। उन्होंने इसे एक पेशेवर सुरक्षा कवच बताया, जिसे हर न्यायिक अधिकारी को अपनाना चाहिए। अंत में, उन्होंने कॉमनवेल्थ मंच पर भारतीय और एशियाई न्यायशास्त्र के योगदान को अधिक पहचान देने का आग्रह किया, ताकि वैश्विक न्याय प्रणाली जन-केंद्रित और प्रभावशाली बन सके।
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