महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति का माहौल है। 12 ज्योतिर्लिंगों समेत प्रमुख शिव मंदिरों में आधी रात से ही भक्त दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रविवार मध्य रात्रि 2.30 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक पूजन किया। भगवान महाकालेश्वर के मस्तक पर त्रिशूल, चंद्र और बेलपत्र अर्पित कर भव्य श्रृंगार किया गया। भगवान के पट 44 घंटे तक खुले रहेंगे और बाबा महाकाल लगातार भक्तों को दर्शन देते रहेंगे। खास बात यह है कि प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती सोमवार को तड़के नहीं, बल्कि दोपहर में होगी।
आज करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। बाबा महाकाल का दूल्हे के रूप में विशेष श्रृंगार किया गया है, जिसके लिए 3 क्विंटल फूल, सवा लाख बेलपत्र और 200 किलो देसी फूलों से 11 फीट लंबा सेहरा तैयार किया गया है। 16 फरवरी को दोपहर 12 बजे साल में एक बार होने वाली भस्म आरती भी संपन्न होगी।
खंडवा
ओंकारेश्वर मंदिर के पट रात 3 बजे खोले गए। यहां 24 घंटे लगातार दर्शन-पूजन का क्रम चलेगा।
वाराणसी
काशी विश्वनाथ मंदिर में रात 2:15 बजे मंगला आरती की गई और सुबह 3:30 बजे मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। देर रात से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं।
देवघर
बाबाधाम में परंपरानुसार पंचशूलों की विशेष पूजा की गई। इसके बाद बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती का पारंपरिक गठबंधन संपन्न हुआ। महाशिवरात्रि पर सुबह 3:15 बजे विशेष पूजा हुई और 4:25 बजे मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। रविवार को यहां शिव-पार्वती विवाह और शाम को शिव बारात निकाली जाएगी। देशभर में “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना में लीन हैं।
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