केंद्र सरकार रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ पदों पर रहे अधिकारियों के लिए 20 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू करने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के तहत ऐसे अफसर अपनी सेवा से जुड़ी किताब या संस्मरण इस अवधि में प्रकाशित नहीं कर सकेंगे। यह चर्चा हाल ही में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक के दौरान सामने आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मुद्दा आधिकारिक एजेंडे में शामिल नहीं था, लेकिन सामान्य चर्चा के दौरान उठा और इस पर जल्द आदेश जारी होने की संभावना जताई जा रही है।
यह पूरा विवाद पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब ‘Four Stars of Destiny’ को लेकर शुरू हुआ, जिसने सियासी और सुरक्षा हलकों में हलचल मचा दी है।
संसद से सोशल मीडिया तक पहुंचा मामला, FIR दर्ज
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 2 फरवरी को संसद में नरवणे की मेमॉयर में बताए गए कुछ घटनाक्रमों का जिक्र करने की कोशिश की, जिस पर सरकार ने कड़ा एतराज जताया क्योंकि किताब आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई थी। बाद में राहुल गांधी किताब की एक कॉपी संसद परिसर में लेकर पहुंचे। इसके कुछ समय बाद किताब का PDF सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने डिजिटल और अन्य फॉर्मेट में मैन्युस्क्रिप्ट के कथित गैरकानूनी सर्कुलेशन को लेकर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी। किताब की पब्लिशर Penguin Random House India ने बयान जारी कर कहा कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है और जो भी अंश प्रसारित हो रहे हैं, वे कॉपीराइट का उल्लंघन हैं। नरवणे ने भी पब्लिशर के रुख का समर्थन किया।
किताब में क्या है विवाद की वजह?
जनरल नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे। उनकी आत्मकथा में सैन्य करियर के अलावा 2020 के भारत-चीन लद्दाख सीमा विवाद, गलवान घाटी की घटनाओं, अग्निपथ योजना और रणनीतिक फैसलों का उल्लेख बताया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार 31 अगस्त 2020 को पैंगोंग त्सो के दक्षिणी किनारे कैलाश रेंज में हुई सैन्य गतिविधियों और उस दौरान सरकार की ओर से तत्काल राजनीतिक निर्देश नहीं मिलने संबंधी उल्लेख ने विवाद को जन्म दिया। किताब जनवरी 2024 में प्रकाशित होनी थी। न्यूज एजेंसी PTI ने दिसंबर 2023 में इसका एक हिस्सा प्रकाशित किया था, जिसमें अग्निवीर योजना से जुड़ा अंश चर्चा में आया। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने नरवणे और पब्लिशर को निर्देश दिया था कि किताब को प्रकाशित करने से पहले सेना से क्लियरेंस ली जाए। सेना ने पुस्तक की समीक्षा कर अपने अवलोकन दर्ज किए और अंतिम निर्णय के लिए मामला रक्षा मंत्रालय को भेज दिया। फिलहाल मंत्रालय की मंजूरी लंबित बताई जा रही है। 2020 से 2024 के बीच रक्षा मंत्रालय 35 किताबों को मंजूरी दे चुका है, लेकिन नरवणे की किताब अब भी पेंडिंग मामलों में शामिल है।
मौजूदा नियम क्या कहते हैं?
Central Civil Services Rules (CCS Rules) 1972 में 2021 के संशोधनों के बाद संवेदनशील या सुरक्षा संबंधी जानकारी के प्रकाशन पर सख्त प्रावधान हैं। पूर्व अधिकारियों को संबंधित मंत्रालय या संगठन से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में Official Secrets Act भी लागू हो सकता है। सरकार यदि 20 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू करती है तो यह नियम सैन्य और अन्य संवेदनशील पदों पर रहे वरिष्ठ अधिकारियों के लिए प्रकाशन संबंधी प्रतिबंधों को और कड़ा कर सकता है। फिलहाल इस प्रस्ताव पर आधिकारिक आदेश का इंतजार है।
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