संगम नगरी प्रयागराज में किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बनीं बॉलीवुड एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। ममता कुलकर्णी को अब महामंडलेश्वर पद से हटा दिया गया है। साथ ही अखाड़े के लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से भी आचार्य महामंडलेश्वर पद छीन लिया गया है। दोनों को किन्नर अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया है। महाकुंभ में अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने कुछ दिन पहले संन्यास की दीक्षा ली थी। संन्यास लेने के बाद ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर बनाया गया था, जिसका जमकर विरोध हुआ और किन्नर अखाड़े में बड़ी कलह शुरु हो गई थी।
अजय दास ने कहा...
किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने कहा है कि अब नए सिरे से अखाड़े का पुनर्गठन किया जाएगा और जल्द ही नए आचार्य महामंडलेश्वर के नाम का ऐलान होगा। अजय दास ने कहा- लक्ष्मी नारायण ने पहले भी मेरी परमिशन के जूना अखाड़ा के साथ एक लिखित अनुबंध 2019 में प्रयागराज कुंभ में किया। जो कि अनैतिक ही नहीं एक प्रकार की चारसौबीसी है। बोले- उन्होंने सनातन धर्म और देशहित को छोड़कर ममता कुलकर्णी जैसी देशद्रोह के मामले में लिप्त महिला जो कि फिल्मी दुनिया से जुड़ी है, उसे बिना किसी धार्मिक व अखाड़े की परंपरा को मानते हुए वैराग्य की दिशा के बजाय सीधा महामंडलेश्वर की उपाधि देकर पट्टा अभिषेक कर दिया। जिस कारण मुझे बेमन से उन्हें इस पद से मुक्त करना पड़ रहा है।
संन्यास कभी भी बिना मुंडन के नहीं होता
आगे उन्होंने कहा कि ये लोग न तो जूना अखाड़े और न ही किन्नर अखाड़े के अनुरूप चल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर किन्नर अखाड़े के गठन के साथ ही वैजन्ती माला गले में धारण करवाई गई थी, जो कि शृ्ंगार की प्रतीकात्मक है, परंतु इन्होंने उसे त्याग कर रुद्राक्ष की माला धारण कर ली। संन्यास कभी भी बिना मुंडन के नहीं होता। उन्होंने यहां भी गलती की है।
महामंडलेश्वर बनने पर क्या बोलीं ममता?
24 जनवरी की शाम को प्रयागराज, महाकुंभ में ममता ने संगम पर अपना पिंडदान किया। फिर किन्नर अखाड़े में उनका पट्टाभिषेक हुआ। ममता मीडिया से बात करके कहा था कि, ये अवसर 144 सालों बाद आया है, इसी में मुझे महामंडलेश्वर बनाया गया है। ये केवल आदिशक्ति ही कर सकती हैं। मैंने किन्नर अखाड़ा ही इसलिए चुना, क्योंकि यहां कोई बंदगी नहीं है, ये स्वतंत्र अखाड़ा है। जीवन में सब चाहिए आपको। एंटरटेनमेंट भी चाहिए। हर चीज की जरूरत होनी चाहिए। ध्यान ऐसी चीज है, जो भाग्य से ही प्राप्त हो सकता है। सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) ने बहुत कुछ देखा था फिर उनमें परिवर्तन आया।”
Comments (0)