बाघों की लुप्तप्राय प्रजाति के लिए दुनिया भर में एक सबसे बड़ा खतरा सामने आ रहा है। ये खतरा कुछ और नहीं बल्कि बाघ के शरीर के भीतर से ही बनने वाला ‘टाइगर बोन ग्लू’ है। यह मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित मध्य भारत के घने भूभाग इस बढ़ते अवैध व्यापार के केंद्र में हैं। 'टाइगर बोन ग्लू' यानी बाघों की हड्डियों से तैयार गोंद, बाघ की हड्डियों को दो-तीन दिनों तक प्रेशर कुक करके बनाया जाता है। तैयार प्रोडक्ट भूरे रंग का चिपचिपा रस जैसा पदार्थ होता है जिसे केक के रूप में बेचा जाता है।
क्यों महत्वपूर्ण है ये बोन ग्लू
टाइगर बोन ग्लू का यूज पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है। माना जाता है कि यह मांसपेशियों और हड्डियों की बीमारियों को ठीक करता है।शक्ति बढ़ाता है और कामोद्दीपक के रूप में भी इसका उपयोग किया जाता है। एक अधिकारी ने कहा कि ‘टाइगर बोन ग्लू’ की मांग इतनी तेजी से बढ़ रही है कि चीन, वियतनाम और दक्षिण पूर्व एशिया के अन्य हिस्सों में अवैध बाघ ‘फार्म’ भी इसे पूरा करने में असमर्थ हैं।
भारी कीमत देने को तैयार
वर्षों से इस व्यापार पर नजर रखने वाले एक वन्यजीव विशेषज्ञ ने कहा कि इसके अलावा, खरीदार जंगली बाघों के 'हड्डी के गोंद' के लिए भारी प्रीमियम देने को तैयार हैं क्योंकि इसे अधिक शक्तिशाली माना जाता है।
इंटरनेशनल सिंडिकेट का भंडाफोड़
हाल ही में वन अधिकारियोंद्वारा ‘देश के सबसे बड़े शिकार नेटवर्क’ का भंडाफोड़ किए जाने के बाद यह बात सामने आई। अधिकारियों ने बताया कि करोड़ों रुपये के लेन-देन का पता चलाहै और इसका संबंध मध्य प्रदेश के अजीत राजगोंड और एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की तरफ से संचालित खानाबदोश शिकारियों के गिरोह से है।
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