कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के लिए कुछ ही घंटे शेष हैं। ऐसे में तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने अपनी चुनावी मशीनरी को पूरी तरह से मुस्तैद कर दिया है। सोमवार को कोलकाता के कैमैक स्ट्रीट स्थित अभिषेक बनर्जी के कार्यालय में एक विशेष रणनीतिक बैठक बुलाई गई। इस बैठक में राज्य की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य और वरिष्ठ नेता अरूप विश्वास ने पार्टी उम्मीदवारों, बीएलए (BLA) और पोलिंग एजेंटों को बूथ के भीतर की चुनौतियों से निपटने के लिए कड़े निर्देश दिए।
एजेंटों के लिए 'करो या मरो' वाली 14 सूत्रीय गाइडलाइन
तृणमूल नेतृत्व ने एजेंटों को स्पष्ट किया है कि बूथ के भीतर उनकी बुद्धिमत्ता और धैर्य ही जीत का सबसे बड़ा रास्ता है। पार्टी की ओर से जारी मुख्य निर्देश इस प्रकार हैं:
1. मॉक पोल और मशीन का ध्यान: एजेंटों को सख्त हिदायत दी गई है कि मॉक पोल खत्म होने के बाद 'क्लियर' (Clear) बटन जरूर दबाएं और मशीन बंद करें, ताकि पुराने डेटा का असर मुख्य मतदान पर न पड़े।
2. धैर्य और सतर्कता: निर्देश दिया गया है कि बूथ के भीतर किसी भी स्थिति में धैर्य न खोएं। साथ ही, सभी एजेंटों को एक साथ खाने या टॉयलेट जाने की मनाही है। हर समय कम से कम एक सतर्क एजेंट का वहां मौजूद रहना अनिवार्य है।
3. नाम पर स्पष्टता: पार्टी का आधिकारिक नाम AITC (All India Trinamool Congress) ही इस्तेमाल किया जाए, 'TMC' नहीं।
4. वोटिंग पैटर्न की निगरानी: हर आधे घंटे में पार्टी के एक निष्ठावान कार्यकर्ता को वोट देने के लिए भेजा जाए, ताकि यह पता चल सके कि मशीन में कोई टेंपरिंग तो नहीं हुई है या स्याही सही से लग रही है या नहीं।
5. प्रिसाइडिंग ऑफिसर पर भरोसा नहीं: एजेंटों को चेतावनी दी गई है कि प्रिसाइडिंग ऑफिसर या किसी मतदान कर्मी के कहने पर आंख बंद करके किसी कागज पर दस्तखत न करें। यदि कोई मतदान कर्मी मशीन के पास जाता है, तो एजेंट भी तुरंत उसके साथ अंदर जाए।
6. वोटर लिस्ट है 'क्वेश्चन पेपर': एजेंटों को वोटर लिस्ट अच्छी तरह से तैयार करके ले जाने को कहा गया है। 'डिलीटेड' (हटाए गए) वोटरों को वोट देने से रोकने के लिए तर्क के साथ विरोध करने का निर्देश दिया गया है।
7. सहायकों पर नजर: दृष्टिहीन मतदाताओं के सहायकों को लेकर केंद्रीय बलों की सख्ती पर नजर रखने और नियमों के तहत उनकी मदद सुनिश्चित करने को कहा गया है।
8. निर्दलीय उम्मीदवारों की पहचान: किसी भी सूरत में 'डमी कैंडिडेट' शब्द का इस्तेमाल न करें, उन्हें 'निर्दलीय उम्मीदवार' ही कहें।
'बिहार मॉडल' से सावधान रहने की चेतावनी
पार्टी नेतृत्व ने एजेंटों को एक नए किस्म के खतरे के प्रति आगाह किया है, जिसे उन्होंने 'बिहार मॉडल का नाम दिया है। चद्रिमा भट्टाचार्य ने बताया कि बिहार के चुनावों में देखा गया था कि हर वोटर लिस्ट में 10-15 संदिग्ध नए नाम (प्रवासियों के नाम पर फॉर्म 6 भरकर) जोड़ दिए गए थे। पार्टी को आशंका है कि बंगाल में भी यह 'खेल' खेला जा सकता है। एजेंटों को निर्देश दिया गया है कि वे संदिग्ध और नए वोटरों के प्रति सतर्क रहें और चिल्लाने के बजाय तर्क और नियमों के आधार पर उन्हें चैलेंज करें।
दुश्मनों के बीच रहना है सजग
अरूप विश्वास ने एजेंटों से कहा, "बूथ के अंदर जो भी आपके सामने है, वे सभी आपके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं। कोई नहीं चाहेगा कि आप जीतें, इसलिए किसी की बातों पर विश्वास न करें और ठंडे दिमाग से हर चाल का मुकाबला करें।"* बैठक के अंत में यह स्पष्ट कर दिया गया कि एजेंटों की सजगता ही बूथ लूटने या मशीनों से छेड़छाड़ के प्रयासों को विफल करेगी।