मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आक्रामक अंदाज देखने को मिला। उन्होंने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए कई सवाल उठाए और कहा कि जो पार्टी आज महिला हित की बात कर रही है, उसने दशकों तक महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा।
55 साल तक क्यों चुप रही कांग्रेस?
सीएम ने सदन में कहा कि कांग्रेस को महिला आरक्षण का विरोध करने के बजाय माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि 1972 में हुए संवैधानिक बदलावों के दौरान कांग्रेस ने महिला आरक्षण के रास्ते में बाधा डाली थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस सत्ता में हो या विपक्ष में, उसका रुख एक जैसा ही रहता है।
पीएम मोदी के प्रस्ताव का जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को यह तक प्रस्ताव दिया था कि वे श्रेय ले लें, लेकिन बिल पास होने दें। इसके बावजूद कांग्रेस ने सहयोग नहीं किया। बिना नाम लिए उन्होंने सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी पर भी निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस में महिला नेतृत्व सीमित दायरे में सिमटा रहा है।
आंकड़ों के जरिए साधा निशाना
सीएम ने कहा कि यदि महिला आरक्षण पहले लागू हो गया होता, तो मध्यप्रदेश विधानसभा की तस्वीर अलग होती। उनके मुताबिक 230 की बजाय 345 सीटें होतीं और इनमें से 114 सीटों पर महिलाएं विधायक के रूप में मौजूद होतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया है।
भाजपा ने दिया महिलाओं और ओबीसी को नेतृत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने हमेशा पिछड़े वर्ग और महिलाओं को आगे बढ़ाया है। उन्होंने उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान का उदाहरण देते हुए कहा कि इन नेताओं को भाजपा ने नेतृत्व का मौका दिया। साथ ही सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे का जिक्र करते हुए महिलाओं को मिले अवसरों को रेखांकित किया।
‘एमपी’ की नई परिभाषा
सीएम ने ‘एमपी’ को नई पहचान देते हुए इसे ‘महिला सशक्तिकरण प्रदेश’ बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के 55 जिलों में से 17 जिलों में महिला कलेक्टर पदस्थ हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा संकेत है।