जबलपुर। मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामलों पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू हो गई है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष सोमवार को यह मामला सूचीबद्ध हुआ, जिसमें कुल 86 याचिकाओं पर सुनवाई होनी है।
28 अप्रैल को फिर होगी बहस
पहले दिन अदालत में शाम 4:35 बजे से 5:10 बजे तक सुनवाई हुई। इस दौरान सभी पक्षों से यह स्पष्ट कराया गया कि उन्हें बहस के लिए कितना समय चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने तय किया कि सबसे पहले ओबीसी आरक्षण का विरोध करने वाले याचिकाकर्ताओं के वकीलों की दलीलें सुनी जाएंगी। इसके बाद राज्य सरकार और फिर आरक्षण के समर्थन में पक्ष रखने वाले वकीलों को सुना जाएगा। अगली सुनवाई 28 अप्रैल को सुबह 11 बजे से होगी।
2019 से चल रहा है मामला
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में अशिता दुबे व अन्य की ओर से दायर याचिका में ओबीसी वर्ग के आरक्षण को 27 प्रतिशत तक बढ़ाने को चुनौती दी गई थी। इसके बाद इस मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष में बड़ी संख्या में याचिकाएं दायर हुईं, जिन्हें एक साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
कई वरिष्ठ अधिवक्ता कर रहे पैरवी
सोमवार की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी, ओबीसी पक्ष के विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और वरुण ठाकुर ने पक्ष रखा। वहीं राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केएम नटराजन भी उपस्थित रहे।
सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट में लौटा मामला
दरअसल, पहले मध्यप्रदेश सरकार ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करा लिया था। हालांकि 19 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों को वापस हाई कोर्ट भेज दिया, जिसके बाद से सुनवाई को लेकर सभी पक्षों में उत्सुकता बनी हुई थी।