भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा महिला आरक्षण लागू करने के लिए पेश किया गया शासकीय संकल्प,नारी शक्ति वंदन अधिनियम विपक्ष के वॉकआउट के बीच ध्वनिमत से पारित हो गया। इस विशेष संकल्प का उद्देश्य विधानसभा में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिला आरक्षण लागू करना था। विधानसभा के एक दिन के विशेष सत्र में करीब 9 घंटे की चर्चा के बाद ये संकल्प पारित किया गया।
सीएम डॉ. मोहन यादव का विपक्ष पर निशाना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में अपने संबोधन की शुरुआत विपक्ष पर कटाक्ष के साथ की। उन्होने शायरी का सहारा लेते हुए विपक्ष पर तंज कसा और कहा, “तू इधर-उधर की बात ना कर,यह बता कि काफिला लुटा कैसे…” उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि 1972 में कांग्रेस ने संविधान संशोधन कर महिला आरक्षण को रोका और लगातार महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया। उन्होंने सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी विधायकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर सार्थक दृष्टिकोण पेश किया।
कांग्रेस महिला विरोधी - सीएम
सीएम डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया था कि केंद्र में बहुमत नहीं है, लेकिन आग्रह किया कि बिल पास कर दो। इसके बावजूद कांग्रेस ने हर बार विरोध किया और नीयत बदलते रहे। सीएम ने कहा कि कांग्रेस जब सत्ता में थी तब भी महिला आरक्षण के बिल को पास नहीं होने दिया और जब विपक्ष में है तब भी समर्थन नहीं करती। सीएम ने आगे कहा कि अगर यह बिल पास हो जाता तो मध्य प्रदेश में 345 विधानसभा सीटों में से 114 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होतीं। उन्होंने बिना नाम लिए सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी पर तंज कसा और कहा कि कांग्रेस के लिए महिला का मतलब केवल एक घर और दो महिला है। उन्होने महिला शक्ति के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने महिलाओं के राजनीतिक अधिकार बढ़ाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए। उन्होंने इसे “आधी आबादी के साथ अन्याय” करार देते हुए कहा कि परिसीमन और संवैधानिक बदलावों में देरी के कारण महिलाओं को बराबरी के अधिकार नहीं मिले।
विपक्ष का पलटवार
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार से पूछा कि महिला आरक्षण को लागू कब किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अधिकार वर्तमान में चाहिए, न कि 2029 या 2047 में। सिंघार ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर मंशा साफ है तो दिल्ली में विशेष सत्र बुलाकर इसे तुरंत लागू किया जाए।