बालाघाट, मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज सुबह 8:30 बजे सूपखार (कान्हा) में जंगली भैंस पुनर्स्थापना परियोजना की शुरुआत करेंगे। इस दौरान 4 जंगली भैंसों—3 मादा और 1 नर—को जंगल में छोड़ा जाएगा।
काजीरंगा से कान्हा: ऐतिहासिक ट्रांसलोकेशन
यह परियोजना काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से कान्हा टाइगर रिजर्व तक जंगली भैंसों के स्थानांतरण पर आधारित है। इसे देश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
100 साल बाद लौट रही प्रजाति
प्रदेश में जंगली भैंसों की आबादी करीब एक सदी पहले खत्म हो चुकी थी। आखिरी बार 1979 के आसपास कान्हा के सूपखार क्षेत्र में इन्हें देखा गया था। अब इस प्रजाति की वापसी से जैव-विविधता को नया जीवन मिलने की उम्मीद है।
क्या है परियोजना की योजना?
- कुल 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य
- इस सीजन में 8 भैंसों का ट्रांसलोकेशन
- वैज्ञानिक पद्धति और विशेषज्ञों की निगरानी में पूरी प्रक्रिया
MP–असम के बीच वन्यजीव सहयोग
गुवाहाटी में मुख्यमंत्री मोहन यादव और असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के बीच हुई बैठक में इस योजना पर सहमति बनी थी। इसके तहत असम से गैंडे मध्यप्रदेश लाए जाएंगे, जबकि बदले में बाघ और मगरमच्छ असम भेजे जाएंगे।
पारिस्थितिकी को मिलेगा मजबूती
विशेषज्ञों के अनुसार, कान्हा का सूपखार क्षेत्र घासभूमि, जल स्रोत और कम मानव हस्तक्षेप के कारण जंगली भैंसों के लिए बेहद अनुकूल है। इससे न केवल इस प्रजाति का संरक्षण होगा, बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।
‘टाइगर स्टेट’ को मिलेगा नया गौरव
मध्यप्रदेश पहले ही ‘टाइगर स्टेट’ और ‘लेपर्ड स्टेट’ के रूप में पहचान बना चुका है। जंगली भैंसों की वापसी इस गौरव को और मजबूत करने के साथ जैव-विविधता में नया आयाम जोड़ेगी।