Assam Assembly Elections 2026: असम में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि 9 अप्रैल 2026 को पूरे राज्य में 126 सीटों के लिए मतदान होगा। राज्य की राजनीतिक हवा पहले से ही गरम है, क्योंकि बीजेपी, कांग्रेस और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चुनावी रणभूमि में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
बीजेपी का विकास और कल्याण पर जोर
भाजपा ने पहले ही उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी थी, जबकि दूसरी सूची में कुछ और उम्मीदवारों के नाम शामिल किए गए। पार्टी का रणनीतिक फोकस विकास योजनाओं और कल्याण कार्यक्रमों पर है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पार्टी 50 प्रतिशत वोट शेयर हासिल कर सत्ता बरकरार रखने का लक्ष्य रख रही है। साथ ही पार्टी अपने सहयोगी दलों जैसे असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (BPF) के साथ मिलकर एनडीए गठबंधन के तहत चुनाव मैदान में सक्रिय है।
कांग्रेस का चुनौतीपूर्ण मार्ग
कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर बीजेपी के खिलाफ मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज़ हैं। पार्टी ने बीजेपी के कुछ उम्मीदवारों के नागरिकता संबंधी मुद्दे उठाए हैं, जो चुनावी बहस का मुख्य केंद्र बन चुके हैं। कांग्रेस का दावा है कि बीजेपी की नीतियाँ आम जनता के लिए लाभकारी नहीं हैं और वह लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रही है।
हमारी क्षमता 160 तक सीटें जीतने की है
वहीं आज यानी की रविवार को असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि, हमारी क्षमता 160 तक सीटें जीतने की है। अभी चुनाव प्रचार शुरू नहीं हुआ है। 26 मार्च से मेरी रैली शुरू होंगी तब सीटों का अंदाज लग पाएगा। उन्होंने आगे कहा कि, किसी की भी टिकट कट सकती है। कभी कभी टिकट कटने के बाद भाग्य खुल जाता है उससे भी बड़ी चीज मिल जाती है। सभी को पार्टी के लिए खुश होकर काम करना चाहिए।
TMC की एंट्री ने चुनावी समीकरण बदल दिए
ममता बनर्जी की पार्टी TMC ने असम में पहली सूची में 17 उम्मीदवारों की घोषणा की। इसमें कई पुराने स्थानीय नेता शामिल हैं, जिन्हें कांग्रेस और अन्य दलों से पार्टी में लाया गया है।दूसरी सूची में TMC ने शर्मन अली अहमद जैसे नामों को भी मैदान में उतारा है, जिससे पार्टी की पैठ उत्तरी और पश्चिमी असम में मजबूत होती दिख रही है।विश्लेषकों का मानना है कि TMC की एंट्री से बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोट विभाजन होगा, जिससे तीसरे विकल्प के रूप में पार्टी का प्रभाव बढ़ सकता है।
चुनावी माहौल और सुरक्षा
राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ रहा है। उम्मीदवारों और पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप आम हो गए हैं। सुरक्षा के लिए सीमा सुरक्षा बल (SSB) ने सीमावर्ती इलाकों में तैयारियों की समीक्षा की है, ताकि मतदान निष्पक्ष और शांतिपूर्ण रहे।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि असम चुनाव में मुख्य मुकाबला अभी भी बीजेपी और कांग्रेस के बीच होगा, लेकिन TMC की एंट्री से समीकरण बदल सकते हैं।
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