देश में तेजी से बढ़ रही जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बीच आयुष मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गैर-संक्रामक रोगों और जोखिम वाले समूहों के लिए एक व्यापक योग प्रोटोकॉल की शुरुआत की गई है। इस पहल को हाल ही में आयोजित योग महोत्सव 2026 के दौरान केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव द्वारा लॉन्च किया गया, जिसे देश की स्वास्थ्य प्रणाली में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
वैज्ञानिक आधार पर तैयार योग प्रोटोकॉल
यह नया प्रोटोकॉल मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान में स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन के पारंपरिक चिकित्सा सहयोगी केंद्र द्वारा विकसित किया गया है। इसे पूरी तरह साक्ष्य-आधारित मॉड्यूल के रूप में तैयार किया गया है, जो योग को केवल आध्यात्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और व्यावहारिक स्वास्थ्य पद्धति के रूप में प्रस्तुत करता है। इसका उद्देश्य लोगों को सरल और प्रभावी तरीके से योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने के लिए प्रेरित करना है।
बढ़ती बीमारियों पर नियंत्रण की दिशा में कदम
देश में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, श्वसन संबंधी समस्याएं और मानसिक स्वास्थ्य विकार तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, देश में होने वाली लगभग दो-तिहाई मौतें इन गैर-संक्रामक रोगों के कारण होती हैं। यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि अब स्वास्थ्य प्रणाली को उपचार के साथ-साथ रोकथाम पर भी ध्यान देना होगा। नया योग प्रोटोकॉल इसी दिशा में एक प्रभावी समाधान के रूप में सामने आया है।
रोजाना योग अभ्यास की सिफारिश
इस प्रोटोकॉल के तहत प्रतिदिन 30 से 60 मिनट तक योग अभ्यास करने की सिफारिश की गई है। इसमें आसन, प्राणायाम, ध्यान और विश्राम तकनीकों का संतुलित समावेश किया गया है। यह मॉड्यूल विभिन्न आयु वर्गों और स्वास्थ्य स्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, ताकि हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार इसे अपना सके। वैज्ञानिक और नैदानिक दृष्टिकोण के आधार पर तैयार यह अभ्यास स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हर आयु वर्ग के लिए विशेष व्यवस्था
इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसमें सभी आयु वर्गों के लिए अलग-अलग मॉड्यूल शामिल किए गए हैं। बच्चों के लिए मनोरंजक योग अभ्यास, किशोरों के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित दिनचर्या, बुजुर्गों के लिए शारीरिक गतिशीलता बढ़ाने वाले अभ्यास और महिलाओं व गर्भवती माताओं के लिए विशेष दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं। यह दर्शाता है कि योग को केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवनभर की स्वास्थ्य पद्धति के रूप में विकसित किया जा रहा है।
स्वास्थ्य के लिए दीर्घकालिक समाधान
इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य योग को लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे नियमित रूप से अपनाया जाए, तो यह न केवल बीमारियों की रोकथाम में मदद करेगा, बल्कि मानसिक और शारीरिक संतुलन को भी बनाए रखेगा। वर्तमान समय में जब जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, ऐसे में यह प्रोटोकॉल एक दीर्घकालिक और स्थायी समाधान के रूप में उभर सकता है।