नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी देते हुए न्यायपालिका में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अलग-अलग राज्यों के कुल 8 हाई कोर्ट में नए चीफ जस्टिस नियुक्त किए गए हैं। इन नियुक्तियों के बाद महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल समेत जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों की न्यायिक व्यवस्था में नए नेतृत्व की शुरुआत होगी।
यह फैसला ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब कई हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के पद पर बदलाव और रिक्तियों को लेकर लंबे समय से प्रक्रिया चल रही थी।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों को मिली मंजूरी
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कॉलेजियम द्वारा विभिन्न हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की जाती है, जिसके बाद केंद्र सरकार और राष्ट्रपति स्तर पर नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होती है।
हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख और छत्तीसगढ़ समेत कई हाई कोर्ट के लिए नए मुख्य न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की थी।
महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल से जुड़े न्यायिक ढांचे में भी बदलाव
इन नियुक्तियों का असर देश के प्रमुख हाई कोर्ट और उनके प्रशासनिक ढांचे पर भी पड़ेगा। महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों के हाई कोर्ट में नेतृत्व से जुड़े बदलावों को न्यायपालिका के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न केवल न्यायिक मामलों की सुनवाई में अहम भूमिका निभाते हैं, बल्कि अदालत के प्रशासन, मामलों के आवंटन और न्यायिक व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट में भी नए नेतृत्व की तैयारी
जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट में भी मुख्य न्यायाधीश के स्तर पर बदलाव न्यायिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के लिए भी नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की सिफारिश की थी।
संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र होने के कारण जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख की न्यायिक व्यवस्था में हाई कोर्ट की भूमिका विशेष महत्व रखती है। ऐसे में नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति से न्यायिक प्रशासन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
न्यायिक रिक्तियों को भरने की दिशा में अहम कदम
केंद्र द्वारा विभिन्न हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति को न्यायिक रिक्तियों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। देश की अदालतों में लंबित मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए न्यायिक पदों को समय पर भरना प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था दोनों के लिए जरूरी है।
नए मुख्य न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने के बाद संबंधित हाई कोर्ट में लंबित मामलों के निस्तारण और प्रशासनिक कार्यों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
देश की न्यायपालिका में लगातार जारी है नियुक्तियों का दौर
हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण की प्रक्रिया लगातार जारी है। इससे पहले भी केंद्र सरकार ने कॉलेजियम की सिफारिशों के आधार पर झारखंड, केरल, पटना और मेघालय हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से संबंधित नियुक्तियों और बदलावों को मंजूरी दी थी।
अब 8 हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी मिलने के बाद देश की उच्च न्यायपालिका में एक बार फिर व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है।