कोलकाता: कोलकाता के कैमैक स्ट्रीट स्थित तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पार्टी कार्यालय को खाली कराने के मामले में एक तरफ जहां कोलकाता सिटी सिविल कोर्ट से पार्टी को अंतरिम राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ फायर ब्रिगेड (दमकल विभाग) के नए नोटिस ने इस जगह के इस्तेमाल पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। अदालत द्वारा संपत्ति पर 'यथास्थिति' (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिए जाने के बावजूद, दमकल विभाग ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए परिसर के उपयोग पर रोक लगा दी है।
सिटी सिविल कोर्ट से मिला अंतरिम स्टे
तृणमूल कांग्रेस के अधिवक्ता आर्क कुमार नाग के अनुसार, 9 कैमैक स्ट्रीट स्थित इमारत की सातवीं और आठवीं मंजिल पर बने पार्टी कार्यालय को 24 घंटे के भीतर खाली करने के लिए भवन मालिक की ओर से 25 अगस्त को नोटिस भेजा गया था। शनिवार को कोलकाता सिटी सिविल कोर्ट के जज सुधीर कुमार ने इस बेदखली नोटिस पर अंतरिम रोक लगाते हुए दोनों पक्षों को मामला लंबित रहने तक 'यथास्थिति' बनाए रखने का निर्देश दिया। अदालत ने इस मामले में दोनों पक्षों को 1 अक्टूबर तक लिखित जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
मालिकाना हक और लीज डीड पर पेंच
मकान मालिक रामा देवी गोयनका ने इस बेदखली नोटिस के खिलाफ एआईटीसी (ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस) की याचिका का विरोध किया। उनकी ओर से दलील दी गई कि लीज समझौता मूल रूप से 'पश्चिम बंगाल तृणमूल युवा कांग्रेस' के साथ हुआ था, इसलिए 'एआईटीसी' के पास इस नोटिस को चुनौती देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। हालांकि, प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अंतरिम राहत दे दी है।

दमकल विभाग का नोटिस और सुरक्षा की चेतावनी
आदालती राहत के बाद भी दमकल विभाग के रुख से पार्टी दफ्तर के इस्तेमाल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। फायर ब्रिगेड का कहना है कि पर्याप्त रखरखाव के अभाव में इमारत का यह हिस्सा बेहद खतरनाक स्थिति में है, जिससे वहां रहने वाले और आसपास के लोगों के जीवन को गंभीर खतरा हो सकता है। विभाग ने आदेश दिया है कि जब तक अग्नि सुरक्षा का नया एनओसी (प्रमाणपत्र) जारी नहीं होता, तब तक इस परिसर का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।
वकीलों की राय और आगे का रास्ता
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही दीवानी अदालत ने बेदखली के नोटिस पर रोक लगा दी हो, लेकिन दमकल विभाग के सुरक्षा संबंधी निर्देशों की अनदेखी नहीं की जा सकती। जब तक सुरक्षा मानकों को पूरा करके नया क्लियरेंस नहीं मिल जाता, तब तक इस दफ्तर का संचालन शुरू करना कानूनी रूप से संभव नहीं होगा।