पटना, 6 सितंबर 2026 | बिहार में गंगा का उफान अब बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। पटना जिले के बाढ़, बख्तियारपुर और मोकामा इलाके में नदी का पानी गांवों, खेतों, स्कूलों और सड़कों तक पहुंच चुका है। शनिवार को बख्तियारपुर और मोकामा के कई हिस्सों में गंगा का पानी पुराने NH-31 को पार कर आबादी वाले क्षेत्रों में फैल गया, जबकि रविवार सुबह भी जलस्तर ऊंचा बना हुआ है। पटना के गांधी घाट पर भी गंगा ने पुराने Highest Flood Level को पार कर दिया है। रविवार के ताजा अपडेट के अनुसार नदी का स्तर 50.57 मीटर तक पहुंचा, जो 2016 के 50.52 मीटर के पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर से करीब 5 सेंटीमीटर ऊपर है।
बख्तियारपुर में NH-31 तक पहुंचा गंगा का पानी
बख्तियारपुर के रवाइच-रानीसराय इलाके में शनिवार को गंगा का पानी पुराने NH-31 पर चढ़ गया। आसपास के घर, दुकानें और खेत भी जलमग्न हो गए। पानी बढ़ने से स्थानीय लोगों की आवाजाही मुश्किल हो गई है और कई परिवार ऊंचे स्थानों की ओर जाने लगे हैं।
मोकामा के शिवनार-बरहपुर में भी सड़क के ऊपर पानी
मोकामा प्रखंड के शिवनार और बरहपुर इलाके में हालात ज्यादा गंभीर हैं। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक शिवनार से बरहपुर के बीच NH-31 पर कई जगह बाढ़ का पानी फैल गया है। बरहपुर के पास सड़क पर करीब एक फीट तक पानी बहने की सूचना है। गंगा के बढ़ते पानी से शिवनार, बरहपुर, कसहा दियारा और जंजीरा दियारा समेत कई इलाके प्रभावित हैं।
हाथीदह में भी गंगा ने पार किया पुराना रिकॉर्ड
मोकामा के हाथीदह में भी गंगा का जलस्तर पुराने रिकॉर्ड से ऊपर पहुंच गया है। ताजा स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक हाथीदह में गंगा ने 2021 के 43.52 मीटर Highest Flood Level को पार कर लिया है। इसका असर सड़क, स्कूल और आसपास की बस्तियों में दिखाई दे रहा है। महेंद्रपुर क्षेत्र में NH-80 पर भी बाढ़ का पानी फैलने की जानकारी है। इसलिए हाथीदह और आसपास के NH-80 इलाके में आवाजाही करने वालों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
सात स्कूलों तक पहुंचा बाढ़ का पानी
मोकामा में बढ़ते जलस्तर का असर स्कूलों पर भी पड़ा है। सात विद्यालयों में बाढ़ का पानी पहुंचने की सूचना के बाद उन्हें बंद करना पड़ा। इनमें कसहा दियारा, जंजीरा दियारा, शिवनार और बरहपुर क्षेत्र के स्कूल शामिल हैं।
पटना में गंगा ने Highest Flood Level पार किया
बाढ़ का संकट केवल मोकामा-बख्तियारपुर तक सीमित नहीं है। पटना शहर में गांधी घाट पर गंगा ने अपना पुराना Highest Flood Level पार कर दिया है। रविवार के ताजा आंकड़ों में गांधी घाट पर जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया, जो पुराने रिकॉर्ड 50.52 मीटर से अधिक है। बांका घाट और पंडारक जैसे स्थानों पर भी गंगा उच्च बाढ़ स्तर से ऊपर बह रही है।
बिहार में 16 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित
बिहार में बाढ़ का दायरा तेजी से बढ़ा है। रविवार के नए आंकड़ों के मुताबिक 11 जिलों के करीब 16.85 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अरवल समेत कई इलाके शामिल बताए गए हैं। अकेले पटना जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 2.32 लाख लोगों के प्रभावित होने की ताजा सूचना है।
राहत के लिए कई जगह चल रहे Community Kitchen
आपकी मूल कॉपी में राहत व्यवस्था केवल प्रखंड मुख्यालय तक सीमित बताई गई है, लेकिन जिला प्रशासन की ताजा जानकारी इससे अलग है। बाढ़ अनुमंडल में मिडिल स्कूल कचहरी, बाढ़ में राहत व्यवस्था है। बख्तियारपुर में सिंचाई भवन सहित राहत केंद्र चलाए जा रहे हैं। मोकामा में नया कसहा पंचायत राज कार्यालय, शिवनगर के विशहरी स्थान, पुरानी कसहा के भोला स्थान, डुमरा-जंजीरा किसान भवन, सीतारामपुर कम्युनिटी भवन, विजयगढ़ और शिवनार प्रखंड परिसर समेत कई स्थानों पर राहत शिविर और सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं।
प्रशासन ने नावें और SDRF भी उतारी
पटना जिला प्रशासन ने राहत-बचाव के लिए नावों की संख्या भी बढ़ाई है। ताजा प्रशासनिक जानकारी के मुताबिक जिले में 72 नावें मुफ्त आवागमन और रेस्क्यू के लिए लगाई गई हैं, जबकि SDRF की टीम 14 नावों के साथ तैनात है। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य और पशुओं के लिए भी इंतजाम किए गए हैं। राज्य स्तर पर बाढ़ प्रभावित इलाकों में सैकड़ों नावों, मेडिकल कैंप और boat ambulance की व्यवस्था की गई है।
ग्रामीणों की राहत बढ़ाने की मांग
इसके बावजूद कई गांवों से पर्याप्त राहत सामग्री नहीं मिलने, पशुओं के चारे और सुरक्षित ठिकानों की कमी जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों की मांग है कि जिन गांवों में बड़ी संख्या में घर जलमग्न हैं, वहां स्कूल, पंचायत भवन और दूसरे सरकारी भवनों को स्थानीय राहत केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जाए, ताकि लोगों को लंबी दूरी तय करके भोजन और सहायता लेने न जाना पड़े। ऐसी स्थानीय मांगों को प्रशासनिक राहत व्यवस्था से अलग रखते हुए खबर में “ग्रामीणों का आरोप/मांग” के रूप में लिखना ज्यादा तथ्यात्मक रहेगा।
पटना शहर को बचाने के लिए 108 गेट बंद
गंगा के रिकॉर्ड स्तर को देखते हुए पटना शहर की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने Town Protection Wall से जुड़े 108 गेट बंद कर दिए हैं। स्लूइस गेट की निगरानी बढ़ाई गई है और पानी निकालने के लिए पंप तैयार रखे गए हैं। कंगन घाट पर बैरिकेडिंग की गई है, जबकि भद्र घाट और महावीर घाट जैसे कुछ क्षेत्र पानी में डूब चुके हैं और वहां लोगों की आवाजाही रोकी गई है।
CM ने अधिकारियों को प्रभावित जिलों में कैंप करने को कहा
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ प्रभावित जिलों के प्रभारी मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में कैंप कर हालात की लगातार निगरानी करने को कहा है। सरकार ने कम्युनिटी किचन, मेडिकल टीम, नाव और राहत सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
आने वाले घंटे बेहद अहम
गंगा पहले ही कई स्थानों पर रिकॉर्ड या खतरे के स्तर से ऊपर बह रही है। ऐसे में पानी का और फैलाव होने पर बख्तियारपुर, मोकामा, पंडारक और बाढ़ अनुमंडल के निचले इलाकों में स्थिति और कठिन हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से नदी, डूबे हुए रास्तों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा जरूरत पड़ने पर राहत शिविरों में जाने की अपील की है।