उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। पिथौरागढ़, नैनीताल, अल्मोड़ा, पौड़ी, बागेश्वर, रुद्रपुर और रुद्रप्रयाग समेत कई इलाकों में बारिश का दौर जारी है। लगातार बारिश के बीच पौड़ी में एक मकान अचानक ढह गया, हालांकि परिवार के सभी सदस्य समय रहते सुरक्षित बाहर निकल गए। वहीं, प्रदेशभर में बारिश और भूस्खलन के कारण 108 सड़कें बंद बताई गई हैं।
पौड़ी में अचानक ढहा मकान, बाल-बाल बचा परिवार
पौड़ी जिले के पाबौ ब्लॉक स्थित सकन्याणा गांव में लगातार हो रही बारिश के बीच रमेश चंद्र पोखरियाल का मकान अचानक भरभराकर गिर गया। जिस समय यह हादसा हुआ, परिवार के सदस्य घर के अंदर ही मौजूद थे। मकान ढहने की आहट मिलते ही परिवार के सभी लोग तुरंत बाहर निकल गए। समय रहते घर से बाहर आने के कारण बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, मकान के क्षतिग्रस्त होने से परिवार को काफी नुकसान हुआ है। घटना की जानकारी मिलने के बाद राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त मकान का स्थलीय निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया और राहत एवं सहायता के लिए रिपोर्ट प्रशासन को भेजी है। लगातार बारिश के चलते गांव में लोगों के बीच डर का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रभावित परिवार को जल्द आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की मांग की है।
बारिश ने रोकी रफ्तार, 108 सड़कें अभी भी बंद
लगातार बारिश का असर उत्तराखंड के सड़क नेटवर्क पर भी पड़ा है। बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेशभर में 108 सड़कें बंद होने की जानकारी सामने आई है। पहाड़ी इलाकों में कई जगह मलबा आने और जलभराव के कारण आवाजाही प्रभावित हुई है। पौड़ी में बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कीर्तिनगर के पास देर रात बारिश के दौरान एक कार अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे गदेरे में जा गिरी। हादसे में जूना अखाड़े के स्वामी स्वरूपानंद यति महाराज, बाबा निरंजन पुरी महाराज समेत तीन संत घायल हुए हैं।
चंपावत में उफनती नदी के बीच फंसे तीन ग्रामीणों का रेस्क्यू
चंपावत के छीनीगोठ क्षेत्र में हुड्डी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से तीन ग्रामीण नदी के दूसरी ओर फंस गए। तीनों ग्रामीण पशुओं के लिए चारा लेने जंगल गए थे, लेकिन अचानक तेज बहाव बढ़ने के कारण वापस नहीं लौट सके। सूचना मिलने के बाद SDRF की टीम मौके पर पहुंची और तेज बहाव के बीच रेस्क्यू अभियान चलाया। टीम ने तीनों ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
देहरादून से रामनगर तक बारिश का असर
इससे पहले शनिवार को देहरादून के जैंतनवाला क्षेत्र में बारिश के बाद नून नदी उफान पर आ गई थी। तेज बहाव में एक महिंद्रा पिकअप नदी में बह गई। रामनगर के पंपापुरी इलाके में PWD गेस्ट हाउस के पास एक विशाल पेड़ सड़क पर गिर गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। वहीं, चमोली में थराली-देवाल मोटर मार्ग पर नंदकेसरी और कोठी के बीच भारी भूस्खलन के कारण रास्ता बंद हो गया था। बाद में सड़क को यातायात के लिए खोल दिया गया।
मौसम विभाग ने इन जिलों के लिए जारी किया यलो अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार उत्तराखंड के सभी जिलों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। देहरादून, हरिद्वार, बागेश्वर, नैनीताल, पौड़ी और चमोली में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना को देखते हुए यलो अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश के तेज दौर देखने को मिल सकते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में आकाशीय बिजली और अचानक बढ़ते जलस्तर को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत है।
7 सितंबर: पांच जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
7 सितंबर को नैनीताल, बागेश्वर, ऊधम सिंह नगर, पौड़ी और चमोली में कहीं-कहीं भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ तेज से अति तेज बारिश के दौर की संभावना जताई गई है। कुछ स्थानों पर आकाशीय बिजली चमकने की भी आशंका है। ऐसे में पहाड़ी और नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
8 और 9 सितंबर को भी पहाड़ों में मौसम रहेगा सक्रिय
8 सितंबर को पहाड़ी जिलों में मौसम के सक्रिय रहने का अनुमान है। कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली चमक सकती है और बारिश के तेज से अति तेज दौर देखने को मिल सकते हैं। 9 सितंबर को भी पहाड़ी क्षेत्रों में इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना है। गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज बारिश को देखते हुए स्थानीय लोगों और यात्रियों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।
उत्तराखंड में बारिश का असर: क्या-क्या बदला?
लगातार बारिश के कारण उत्तराखंड में कई जगह जनजीवन प्रभावित हुआ है। कहीं मकान ढहने की घटना सामने आई है तो कहीं सड़कें भूस्खलन के कारण बंद हुई हैं। नदियों और गदेरों में जलस्तर बढ़ने से रेस्क्यू ऑपरेशन भी चलाने पड़े हैं। ऐसे मौसम में पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वालों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए और प्रशासन की ओर से जारी स्थानीय अलर्ट को गंभीरता से लेना चाहिए।