सागर, 6 सितंबर 2026 | मध्यप्रदेश के सागर जिले में संदिग्ध जहरीली शराब के सेवन के बाद बड़ा हादसा सामने आया है। बंडा क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले की जांच के आदेश देते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
शनिवार रात शराब पीने के बाद बिगड़ी तबीयत
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक शनिवार रात बंडा क्षेत्र के कई गांवों के लोगों ने कथित अवैध शराब का सेवन किया था। इसके कुछ समय बाद लोगों को उल्टी, घबराहट और तबीयत बिगड़ने जैसी शिकायतें होने लगीं। अलग-अलग मरीजों को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों और सागर के बड़े अस्पतालों में भेजा गया। जैसे-जैसे मरीज सामने आते गए, मृतकों की संख्या भी बढ़ती गई।
30 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 30 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं और कम से कम तीन मरीजों की हालत गंभीर बताई गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर ऐसे लोगों की तलाश भी कर रही है, जिन्होंने पिछले 48 घंटे के दौरान संदिग्ध शराब पी हो और अब तक अस्पताल नहीं पहुंचे हों। प्रशासन ने लोगों से तबीयत खराब होने पर तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपील की है।
CM डॉ. मोहन यादव ने दिए जांच के आदेश
घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मजिस्ट्रियल जांच भी शुरू
सागर जिला प्रशासन ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी है। पुलिस और आबकारी विभाग संदिग्ध शराब कहां से आई, किसने बेची और उसमें कौन-सा पदार्थ मिला था, इसकी जांच कर रहे हैं। कुछ नमूने और शराब की बोतलें भी जब्त की गई हैं। इन्हें परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।
छह शराब दुकानें सील
घटना के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बंडा क्षेत्र की छह शराब दुकानों को सील कर दिया है। वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी प्रभावित गांवों में पहुंचे हैं तथा शराब के नमूने लेने के निर्देश दिए गए हैं। आबकारी विभाग के अधिकारी भी क्षेत्र में अवैध शराब के संभावित नेटवर्क की जांच कर रहे हैं।
गांवों में Door-to-Door Screening
प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य टीमों को उतार दिया है। तीन प्रमुख प्रभावित गांवों में मेडिकल टीमें घर-घर जाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं। ऐसे व्यक्ति जिन्होंने शराब पी थी और उन्हें उल्टी, चक्कर, आंखों के सामने धुंधलापन, पेट दर्द या बेहोशी जैसे लक्षण हों, उन्हें तुरंत अस्पताल लाने पर जोर दिया जा रहा है।
क्या Methanol से हुई मौतें?
प्रारंभिक स्तर पर मिथाइल अल्कोहल यानी Methanol poisoning की आशंका जताई गई है, लेकिन प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है। मृत्यु का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम, विसरा और फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए अभी यह कहना कि सभी मौतें निश्चित रूप से जहरीली शराब या Methanol से हुई हैं, जल्दबाजी होगी।
आबकारी विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
घटना के बाद अवैध शराब की बिक्री को लेकर प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि क्षेत्र में संदिग्ध शराब को लेकर पहले शिकायतें भी की गई थीं। हालांकि इस दावे की विभागीय जांच अभी बाकी है, इसलिए यह साफ होना बाकी है कि शिकायत मिलने के बावजूद कार्रवाई हुई थी या नहीं।
डिप्टी CM ने कहा- किसी को नहीं बख्शेंगे
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने घटना पर दुख जताया है। उन्होंने बताया कि जिला कलेक्टर और एसपी से मामले की जानकारी ली गई है और आबकारी आयुक्त को भी मौके पर भेजा जा रहा है। देवड़ा ने कहा कि हादसे के पीछे जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन के लिए अगले कुछ घंटे अहम
मेडिकल स्क्रीनिंग के दौरान और मरीज सामने आ सकते हैं। यही वजह है कि अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है और संदिग्ध शराब पीने वाले लोगों से लक्षण छिपाने के बजाय तुरंत जांच कराने की अपील की जा रही है। जांच का फोकस अब तीन बातों पर होगा—शराब का स्रोत क्या था, उसमें जहरीला पदार्थ था या नहीं और अवैध शराब का नेटवर्क किस स्तर पर चल रहा था।