सागर/भोपाल। मध्य प्रदेश के सागर जिले में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से हुई मौतों ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। बंडा क्षेत्र के कई गांवों में जहरीली शराब से लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के अस्पताल में भर्ती होने के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में शराब माफिया बेखौफ हैं और अवैध शराब का नेटवर्क लगातार लोगों की जान के लिए खतरा बना हुआ है।
मध्य प्रदेश पर शराब माफियाओं का कब्जा'
जीतू पटवारी ने सागर की घटना पर सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में शराब माफियाओं का प्रभाव बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि सागर में जहरीली शराब से जुड़ी घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं और इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। पटवारी ने कहा कि वह पहले भी सागर जाकर पीड़ित परिवारों से मिल चुके हैं। उनके मुताबिक, नशे की समस्या से प्रभावित परिवारों की स्थिति बेहद गंभीर है और माता-पिता अपने बच्चों को नशे से बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अवैध शराब के कारण गरीब परिवारों के घर उजड़ रहे हैं, तब शासन-प्रशासन की चुप्पी चिंता पैदा करती है।
10 लोगों की मौत, कई अस्पताल में भर्ती
सागर जिले के बंडा क्षेत्र के कई गांवों में संदिग्ध जहरीली शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई। शुरुआती रिपोर्टों में मौतों का आंकड़ा 8 से बढ़कर 10 तक पहुंचने की बात सामने आई है, जबकि 25 से ज्यादा लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी गई है। कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई गई है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती चरण में कम से कम आठ मौतों की सूचना थी और कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रशासन की ओर से प्रभावित गांवों में मेडिकल टीमें भेजकर घर-घर जांच भी कराई जा रही है। संदिग्ध जहरीले पदार्थ के रूप में मेथनॉल की आशंका जताई गई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
न्यायिक जांच की मांग
जीतू पटवारी ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सिर्फ अवैध शराब बेचने वाले छोटे आरोपियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे मौजूद लोगों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों की भी जांच होनी चाहिए। पटवारी ने सरकार से मांग की कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि शराब माफियाओं को 24 घंटे के भीतर सलाखों के पीछे किया जाना चाहिए।
'सिर्फ हादसा नहीं, पूरे नेटवर्क की जांच जरूरी'
कांग्रेस का आरोप है कि सागर में हुई घटना को केवल एक स्थानीय शराब कांड के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी नेताओं ने अवैध शराब की सप्लाई, उसके वितरण और प्रशासनिक स्तर पर संभावित लापरवाही की जांच की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सरकार से उच्चस्तरीय जांच टीम सागर भेजने और मृतकों के परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अवैध शराब के कारोबार के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क तक जांच पहुंचनी चाहिए।
सरकार ने भी दिए जांच और कार्रवाई के निर्देश
वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर की घटना को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेगी और मामले की जांच कराकर कठोर कदम उठाए जाएंगे।
अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि संदिग्ध शराब कहां से आई, इसे किसने तैयार या सप्लाई किया और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं। प्रशासन की जांच के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अवैध शराब के कारोबार को रोकने में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं।
राजनीतिक तौर पर भी गरमाया मामला
सागर की घटना ने मध्य प्रदेश में अवैध और जहरीली शराब को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा है कि बार-बार ऐसी घटनाओं के बावजूद अवैध शराब के नेटवर्क पर पूरी तरह लगाम क्यों नहीं लग पा रही है। फिलहाल प्रशासन की जांच जारी है और मौतों तथा अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या में बदलाव संभव है। ऐसे में घटना की अंतिम स्थिति आधिकारिक जांच और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।