जयपुर समेत राजस्थान के कई हिस्सों में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। शनिवार को प्रदेश के कई जिलों में दिनभर बारिश होती रही, जिससे नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया। सवाई माधोपुर, बारां, बूंदी और कोटा में कई रपट पानी में डूब गईं, जबकि लगातार बारिश के कारण पूर्वी राजस्थान में दिन का तापमान कई जगह सामान्य से करीब 6 डिग्री तक नीचे चला गया। मौसम विभाग के मुताबिक रविवार को भी प्रदेश के 20 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट है। बारिश का मौजूदा दौर 8 सितंबर तक जारी रहने की संभावना है। इसके बाद करीब एक सप्ताह तक प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने का अनुमान है।
खंडार में 102 MM बारिश, कई इलाकों में तीन इंच तक बरसा पानी
पिछले 24 घंटे में सवाई माधोपुर के खंडार में सबसे ज्यादा 102 MM बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा करौली, भरतपुर और अलवर के कई इलाकों में करीब 3 इंच तक पानी बरसा। अजमेर, बारां, बूंदी, दौसा, धौलपुर, करौली, टोंक, सीकर, कोटा और भीलवाड़ा के अलग-अलग हिस्सों में 1 से 2 इंच तक बारिश रिकॉर्ड की गई। तेज बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव और नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर का असर देखने को मिला।
बारिश बढ़ी तो बांधों से छोड़ा गया पानी, दो डैम छलके
लगातार बारिश के बाद राजस्थान के कई बांधों में पानी की आवक बढ़ गई। स्थिति को देखते हुए अलग-अलग बांधों के गेट खोलकर अतिरिक्त पानी की निकासी की गई। भरतपुर के बंध बारैठा बांध के 2, धौलपुर के पार्वती बांध के 2, झालावाड़ के कालीसिंध बांध के 3 और कोटा के नवनेरा बांध के 7 गेट खोले गए। वहीं, धौलपुर का रामसागर डैम और सवाई माधोपुर का मानसरोवर बांध ओवरफ्लो होकर छलक गया। बांधों से पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को नदी-नालों के आसपास अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
रपटों पर चढ़ा पानी, ग्रामीण इलाकों में आवाजाही प्रभावित
सवाई माधोपुर, बारां, बूंदी और कोटा के कई हिस्सों में बारिश के बाद नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा। नदियों पर बनी कई रपट पानी में डूब गईं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हुआ। बारां के कुछ ग्रामीण इलाकों में रास्ते बंद होने के बावजूद लोगों के नदी पार करने की तस्वीरें सामने आईं। बढ़ते जलस्तर के बीच इस तरह नदी पार करना जोखिम भरा हो सकता है।
पूर्वी राजस्थान में मौसम हुआ ठंडा, पश्चिम में गर्मी का असर बरकरार
पूर्वी राजस्थान में लगातार दो दिन से हो रही बारिश का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दिया। कई जिलों में दिन का तापमान सामान्य से करीब 6 डिग्री तक नीचे पहुंच गया। जयपुर, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, दौसा और सवाई माधोपुर समेत कई जिलों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री से नीचे रहा। इसके चलते दिन के समय भी मौसम में ठंडक महसूस हुई। हालांकि, पश्चिमी राजस्थान में तस्वीर अलग रही। यहां सितंबर के महीने में भी गर्मी का असर बना हुआ है और कई जिलों में दिन का तापमान 35 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया।
रविवार को जयपुर और भरतपुर संभाग में भारी बारिश के आसार
मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के मुताबिक वेलमार्क लो-प्रेशर सिस्टम उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा के आसपास सक्रिय है। इसके प्रभाव से रविवार को जयपुर और भरतपुर संभाग के कुछ हिस्सों में मध्यम से तेज बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है। वहीं, कोटा संभाग में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।
7 सितंबर से कमजोर होगा सिस्टम, 8 सितंबर के बाद राहत के संकेत
मौसम विभाग के अनुसार 7 सितंबर से मौजूदा मौसम तंत्र का प्रभाव कमजोर पड़ना शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही बारिश की गतिविधियों में भी कमी आने की संभावना है। 8 सितंबर से प्रदेश में बारिश काफी कम होने का अनुमान है। इसके बाद करीब एक सप्ताह तक मानसून की गतिविधियां कमजोर रह सकती हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर कहीं-कहीं बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।
राजस्थान में बारिश से क्या बदला?
मानसून के दोबारा सक्रिय होने से पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में तापमान में गिरावट आई है, लेकिन दूसरी ओर नदियों और बांधों में पानी बढ़ने से ग्रामीण इलाकों में परेशानी भी बढ़ी है। कई रपट डूबने और बांधों के गेट खोलने के बाद जलभराव वाले क्षेत्रों में आवाजाही को लेकर सतर्कता जरूरी हो गई है।