कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में बंगाल पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में सीआईडी और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने बिहार और उत्तर प्रदेश से तीन शार्पशूटरों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों को देर रात कोलकाता लाया गया, जहां भवानी भवन में उनसे लगातार पूछताछ की गई।
यूपीआई ट्रांजैक्शन से मिला अहम सुराग
जांच एजेंसियों को मामले में बड़ा सुराग उस वक्त मिला, जब आरोपियों द्वारा बाली टोल प्लाजा पर किए गए यूपीआई पेमेंट की जानकारी सामने आई। डिजिटल ट्रांजैक्शन की कड़ी जोड़ते हुए जांच टीम उत्तर प्रदेश तक पहुंची और वहां से संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। इसके बाद बिहार में भी छापेमारी कर कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया।
चुनाव नतीजों के बाद हुई थी हत्या
बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद 6 मई की रात मध्यग्राम में चंद्रनाथ रथ पर हमला किया गया था। बाइक और कार सवार हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थीं। गोली उनके सीने और हाथ में लगी थी। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
फर्जी नंबर प्लेट और सुनियोजित साजिश का खुलासा
जांच में सामने आया है कि हत्या पूरी प्लानिंग के साथ की गई थी। हमलावरों ने जिस कार का इस्तेमाल किया, उसकी नंबर प्लेट फर्जी थी। पुलिस के मुताबिक, सिलीगुड़ी के एक व्यक्ति द्वारा OLX पर डाली गई कार की तस्वीर का इस्तेमाल कर नकली नंबर प्लेट तैयार की गई थी। इससे साफ है कि आरोपियों ने पहचान छिपाने के लिए पहले से तैयारी कर रखी थी।
बक्सर से विशाल श्रीवास्तव हिरासत में
बक्सर जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पांडेयपट्टी निवासी विशाल श्रीवास्तव को भी बंगाल एसटीएफ ने हिरासत में लिया है। विशाल पर हत्या, आर्म्स एक्ट और मारपीट सहित कई गंभीर आपराधिक मामले पहले से दर्ज बताए जा रहे हैं। हालांकि बक्सर पुलिस ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया कि उसे सीधे चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में गिरफ्तार किया गया है या पूछताछ के लिए ले जाया गया है।
किसने दी सुपारी? जांच में जुटी एजेंसियां
भवानी भवन में चल रही पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि शार्पशूटरों को किसने हायर किया था और चंद्रनाथ रथ को निशाना बनाने के पीछे असली मकसद क्या था। सूत्रों के अनुसार, हत्या के पीछे बड़े राजनीतिक और आपराधिक नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।