देहरादून: रसोई गैस की भारी कमी ने देहरादून के स्ट्रीट फूड कारोबार को हिला कर रख दिया है। शहर की सड़क किनारे लगने वाली ठेलियों और छोटे ढाबों पर अब परांठे और छोले-भटूरे कम दिखते हैं, जबकि राजमा-चावल और कढ़ी-चावल जैसे व्यंजन बढ़ गए हैं।
अब कीमत 30-35 रुपये तक पहुंच गई है
गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमत और अनियमित आपूर्ति ने छोटे खाद्य कारोबारियों को मेन्यू बदलने पर मजबूर कर दिया है। इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। शहर के प्रमुख बाजारों और दफ्तरों के आसपास जहां पहले आलू या प्याज के परांठे 20 रुपये में मिल जाते थे, वहां अब कीमत 30-35 रुपये तक पहुंच गई है।
एक सिलेंडर जल्दी खत्म हो जाता है
ठेली संचालक रामवीर बताते हैं कि, तवे और कड़ाही पर लगातार गैस जलाकर काम करना अब मुश्किल हो गया है। एक सिलेंडर जल्दी खत्म हो जाता है और नया समय पर मिलना भी चुनौती बन गया है। इसलिए हम ऐसे व्यंजन बढ़ा रहे हैं जिन्हें धीमी आंच पर लंबे समय तक रखा जा सके। इसी वजह से राजमा-चावल और कढ़ी-चावल ज्यादा बिक रहे हैं।
तंदूरी परांठे का स्वाद अलग आता है
ग्राहकों का कहना है कि पहले 50 रुपये में नाश्ता और चाय हो जाती थी, अब उतने में केवल एक प्लेट भोजन ही मिल पाता है। गैस के साथ तेल, मसाले और सब्जियों की बढ़ती कीमतों ने भी खर्च बढ़ा दिया है। कुछ ठेलियों ने समाधान के तौर पर छोटे तंदूर लगाने शुरू किए हैं। तंदूर में एक साथ कई परांठे तैयार हो जाते हैं, जिससे गैस की खपत घटती है। हालांकि, तंदूरी परांठे का स्वाद अलग आता है, लेकिन लागत नियंत्रित रखने के लिए यह जरूरी हो गया है।