नई दिल्ली - अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चंदा गबन मामले को लेकर सियासी और धार्मिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है, जबकि साधु-संत भी खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस बीच सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन कर जांच तेज कर दी है। वहीं, मामले में नाम आने के बाद संबंधित सभी आरोपियों ने अपने पदों से इस्तीफा भी दे दिया है।इसी बीच प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने इस पूरे मामले पर बड़ा बयान दिया है।

राम मंदिर चंदा विवाद पर जताई चिंता
प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने अपने इस बयान में कहा है कि, मंदिरों के प्रबंधन में व्यापक बदलाव की मांग की है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए देश में सनातन बोर्ड का गठन किया जाना चाहिए और मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाना चाहिए। ठाकुर ने कहा कि राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा गबन जैसे मामलों से करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं। उनका मानना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मंदिरों के संचालन और वित्तीय प्रबंधन के लिए एक मजबूत एवं पारदर्शी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि समय रहते उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो भविष्य में भी धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहेंगे।
सनातन बोर्ड बनाने की उठाई मांग
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने केंद्र की मोदी सरकार से सनातन बोर्ड के गठन की मांग करते हुए कहा कि यह बोर्ड मंदिरों के संचालन, आय-व्यय और विकास कार्यों की निगरानी कर सकता है। उनके अनुसार, इससे मंदिरों की संपत्तियों और दान राशि का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित होगा और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि यह बोर्ड केवल प्रशासनिक संस्था नहीं, बल्कि सनातन समाज के हितों की रक्षा करने वाला एक प्रभावी मंच होना चाहिए।
राहुल गांधी, अखिलेश और केजरीवाल से की अपील
देवकीनंदन ठाकुर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत सभी विपक्षी नेताओं से भी अपील की। उन्होंने आगे पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि, यदि आप वास्तव में सनातन समाज की भलाई चाहते हैं, तो सरकार से सनातन बोर्ड बनाने की मांग का समर्थन करें। यह किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनियों की आस्था का विषय है।
मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग
उन्होंने कहा कि देश के मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाना चाहिए ताकि उनकी आय और संसाधनों का उपयोग धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में हो सके। उनके अनुसार, मंदिरों की संपत्ति का उपयोग समाज के कल्याण के लिए होना चाहिए, न कि सरकारी नियंत्रण में सीमित रहना चाहिए।

अस्पताल और गुरुकुल बनाने का सुझाव
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि मंदिरों की आय का उपयोग निःशुल्क अस्पताल, गुरुकुल, शिक्षा संस्थान और अन्य जनकल्याणकारी परियोजनाओं के निर्माण में किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे समाज के कमजोर वर्गों को लाभ मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि धार्मिक संस्थानों के संसाधनों का उपयोग समाज सेवा और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए होना चाहिए, जिससे सनातन परंपरा और अधिक मजबूत हो सके।