खड़गपुर/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद अब नई सरकार के गठन और चेहरों को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। इसी कड़ी में बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
10 साल बाद विधानसभा में वापसी
दिलीप घोष ने खड़गपुर सदर निर्वाचन क्षेत्र से शानदार जीत दर्ज की है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार प्रदीप सरकार को 30,000 से अधिक मतों के अंतर से शिकस्त दी। गौरतलब है कि घोष 10 साल बाद फिर से विधायक के रूप में विधानसभा पहुंच रहे हैं।
जिम्मेदारी पर क्या बोले दिलीप?
मंगलवार सुबह खड़गपुर में मॉर्निंग वॉक के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए दिलीप घोष ने अपनी भावी भूमिका पर कहा, "पार्टी ने मुझे टिकट दिया, मैंने चुनाव लड़ा और विधायक बना। अब पार्टी मुझे जो भी जिम्मेदारी देगी, मैं उसे स्वीकार करूँगा।"
टीएमसी पर साधा निशाना
ममता सरकार की विदाई पर कटाक्ष करते हुए घोष ने कहा कि बंगाल के लोगों ने तृणमूल के अत्याचारों को सहते हुए उन्हें 15 साल का मौका दिया था, लेकिन इस बार जनता ने उन्हें पूरी तरह नकार दिया है। उन्होंने वामपंथियों के पतन की याद दिलाते हुए कहा कि जिस तरह बुद्धदेव भट्टाचार्य के समय पूरा मोर्चा बह गया था, वैसा ही इस बार टीएमसी के साथ हुआ है।
चुनावी आंकड़ों की स्थिति
सोमवार को हुई मतगणना के बाद राज्य की राजनीतिक तस्वीर साफ हो गई है:
बीजेपी: 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया।
तृणमूल कांग्रेस: 81 सीटों पर सिमट गई।
अन्य: कांग्रेस को 2, माकपा को 1 और आईएसएफ को 1 सीट मिली है।
हुमायूं कबीर: आम जनता विकास पार्टी के बैनर तले रेजिनगर और नवादा, दोनों सीटों से जीत दर्ज कर चौंकाया है।