पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम इस बार कई मायनों में चौंकाने वाले रहे। जहां एक तरफ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा ने अधिकांश सीटों पर कब्जा जमाया, वहीं कांग्रेस और वामपंथी दलों ने भी लंबे समय बाद अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कुल मिलाकर इन दोनों प्रमुख दलों के अलावा अन्य पार्टियों को 6 सीटों पर जीत मिली, जिससे राज्य की राजनीति में एक नया संतुलन देखने को मिला।
मुर्शिदाबाद में कांग्रेस की वापसी
कांग्रेस ने इस बार अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था और सभी की नजरें खासतौर पर मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों पर टिकी थीं। हालांकि मालदा में पार्टी कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सकी, लेकिन मुर्शिदाबाद में कांग्रेस ने अपनी साख बचाने में सफलता हासिल की। फरक्का से मोतब शेख और रानीनगर से जुल्फिकार अली ने जीत दर्ज कर पार्टी का खाता खोला।
हुमायूं कबीर का ‘डबल कमाल’
तृणमूल कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी बनाने वाले हुमायूं कबीर ने इस चुनाव में बड़ा राजनीतिक दांव खेला। उनकी पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी ने 150 से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन चर्चा का केंद्र खुद हुमायूं रहे। उन्होंने रेजिनगर और नवादा दोनों सीटों पर जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक साख को मजबूत कर लिया।
वाम दलों का आंशिक पुनरागमन
लगातार पिछली हार के बाद वाम दलों पर ‘शून्य’ का ठप्पा लग गया था। इस बार भी बड़ी सफलता नहीं मिली, लेकिन मुर्शिदाबाद की डोमकल सीट से सीपीएम उम्मीदवार मोहम्मद मुस्तफिजुर रहमान ने जीत दर्ज कर पार्टी को राहत दी। यह जीत वामपंथियों के लिए एक प्रतीकात्मक वापसी मानी जा रही है।
भानगढ़ में नौशाद सिद्दीकी की जीत
आईएसएफ नेता नौशाद सिद्दीकी ने एक बार फिर भानगढ़ सीट पर अपना दबदबा कायम रखा। तृणमूल के शौकत मोल्लाह के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने जीत हासिल कर यह साबित किया कि क्षेत्र में उनकी पकड़ अब भी मजबूत है।
बंगाल चुनाव 2026 ने यह साफ कर दिया है कि राज्य की राजनीति अब सिर्फ दो बड़े दलों तक सीमित नहीं रही। छोटे दलों और नए राजनीतिक चेहरों ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर आने वाले समय के लिए नए समीकरण तैयार कर दिए हैं।