नई दिल्ली: इस बार सर्दियों में कड़ाके की ठंड का असर कम रहने की आशंका जताई जा रही है। प्रशांत महासागर में अल नीनो के प्रभाव के चलते उत्तर और मध्य भारत में दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच तापमान सामान्य से 1 से 2 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है। इससे शीतलहर वाले दिनों की संख्या कम होने और रात के तापमान में बढ़ोतरी की संभावना है। मौसम के इस संभावित बदलाव का असर रबी की फसलों पर भी पड़ सकता है। वहीं, फरवरी-मार्च से गर्मी के तेवर तेज होने और आगामी गर्मी के मौसम में लू का खतरा बढ़ने की आशंका जताई गई है।
अल नीनो के असर से बदल सकता है सर्दियों का मिजाज
पंजाब के मोहाली स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) के पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के विशेषज्ञ ने अल नीनो के संभावित प्रभावों को लेकर आगाह किया है। भारतीय मौसम विज्ञान सोसायटी (IMS) की ओर से हिमपरिसर में आयोजित एक विशेष सम्मेलन में उन्होंने भारत के मौसम, जलवायु और कृषि चक्र पर इसके असर की चर्चा की।
विशेषज्ञ के अनुसार, यदि सर्दियों में तापमान सामान्य से अधिक रहता है, तो ठंड का असर सीमित हो सकता है। इसके बाद फरवरी और मार्च में तापमान तेजी से बढ़ने की स्थिति बन सकती है।
सामान्य से ज्यादा तापमान रहने के 70% तक आसार
दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के दौरान उत्तर भारत के मैदानी इलाकों, खासकर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की 70 प्रतिशत संभावना जताई गई है।हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इस बार शीतलहर नहीं चलेगी। पश्चिमी विक्षोभ, स्थानीय मौसम परिस्थितियां और अन्य जलवायु कारक ठंड की तीव्रता को प्रभावित कर सकते हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अक्टूबर 2026 के आंकलन में भी दक्षिण एशिया के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना बताई गई है।
गेहूं, सरसों और दालों की फसलों पर पड़ सकता है असर
सर्दियों में तापमान सामान्य से ज्यादा रहने और बारिश कम होने का असर रबी की फसलों पर पड़ सकता है। गेहूं, सरसों और दालों की बेहतर वृद्धि के लिए अनुकूल तापमान और पर्याप्त नमी जरूरी होती है।यदि सर्दियों में तापमान तेजी से बढ़ता है, तो फसलों के विकास चक्र पर असर पड़ सकता है। खासकर गेहूं की फसल में समय से पहले गर्मी बढ़ने पर दाने भरने की प्रक्रिया प्रभावित होने का जोखिम रहता है। इससे पैदावार पर दबाव पड़ सकता है।
जलाशयों में पानी की उपलब्धता भी चिंता का विषय
देश के 178 प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडार उनकी कुल क्षमता का करीब 70 प्रतिशत था, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत कम बताया गया है।यदि सर्दियों में बारिश कम होती है और तापमान सामान्य से अधिक रहता है, तो कुछ क्षेत्रों में सिंचाई और जल प्रबंधन की चुनौतियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में रबी की फसलों के लिए मौसम के साथ जल उपलब्धता पर भी नजर रखना जरूरी होगा।
क्या है अल नीनो, जो बदल सकता है मौसम का मिजाज?
अल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के पानी का सामान्य से अधिक गर्म होना है। यह समुद्र और वायुमंडल के बीच होने वाली प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है, जिससे दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश और तापमान के पैटर्न में बदलाव आ सकता है।भारत में अल नीनो का संबंध मानसून और तापमान की परिस्थितियों से देखा जाता है।
फरवरी से गर्मी के तीखे तेवर दिखने की आशंका
मौसम विशेषज्ञों के आंकलन के मुताबिक, यदि सर्दियों में तापमान सामान्य से अधिक रहता है, तो फरवरी-मार्च में गर्मी समय से पहले बढ़ सकती है। आगामी गर्मी के मौसम में लू का जोखिम भी बढ़ने की आशंका जताई गई है।हालांकि, अभी इसे पूरे देश के लिए निश्चित पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए। गर्मी कितनी जल्दी बढ़ेगी और किन क्षेत्रों में लू का असर ज्यादा रहेगा, इसकी स्पष्ट तस्वीर आने वाले महीनों के मौसम पूर्वानुमानों से मिलेगी।