किसानों के प्रदर्शन का आज 14 फरवरी को दूसरा दिन है। पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर मंगलवार को हुई झड़प के बाद रातभर किसानों का 'दिल्ली चलो' मार्च रुका रहा और एक बार फिर से इसकी शुरुआत हो गई है। इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) चीफ और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार को किसानों के मुद्दे पर सलाह दी है और उनके साथ किए जा रहे बर्ताव पर निशाना साधा है।
ये मोदी सरकार की विफलता है
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'ये मोदी सरकार की विफलता है। उन्हें MSP के लिए कानूनी गारंटी की किसानों की मांग को पूरा करना चाहिए था। किसानों की दूसरी मांग स्वामीनाथन कमिटी के फॉर्मूले को लागू करना है। सरकार ऐसा करने में समय क्यों बर्बाद कर रही है?' उन्होंने आगे कहा, 'आप किसानों को ऐसे रोक रहे हैं जैसे पड़ोसी देश की सेना आ रही है। उनकी मांगों को देश के प्रधानमंत्री को तुरंत स्वीकार करना चाहिए। चुनाव आ रहे हैं, उन्हें फायदा मिलेगा।'
अधिकांश मुद्दों पर आम सहमति बन गई
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा है कि पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर शंभू में 10 हजार किसान मौजूद हैं। उन्होंने तीन केंद्रीय मंत्रियों के साथ पांच घंटे तक मीटिंग की, जिसके बाद मार्च को फिर से शुरू करने का ऐलान किया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने किसान नेता संग वार्ता के को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। मुंडा ने संकेत दिया कि अधिकांश मुद्दों पर आम सहमति बन गई है, एक समिति के गठन के माध्यम से शेष मुद्दों के समाधान के लिए प्रस्ताव रखे गए हैं।
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