Jabalpur: डॉक्टर को धरती पर भगवान के रूप में देखा जाता है। । ऐसे ही हैं डा. (कैप्टन) मुनीश्वर (Dr. MC Dawar ) चंद्र डावर। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जब पद्मश्री पुरस्कार के लिए उनके नाम की घोषणा की गई तो संस्कारधानी में खुशी छा गई। 77 वर्षीय डा. डावर नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज अस्पताल में 1967 बैच के एमबीबीएस छात्र रहे हैं। 1971 में पाकिस्तान से युद्ध में उन्होंने हिस्सा लिया था। डा. एमसी डावर भारतीय सेना में एक साल ही पदस्थ रहे। 1971 की लड़ाई में उनकी पदस्थापना बांग्लादेश में की गई थी। जहां उन्होंने घायल जवानों की जान बचाई थी।
फीस है मात्र 10 रूपये
बता दें कि युद्ध खत्म होने के बाद स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने सेना की (Dr. MC Dawar) नौकरी से त्यागपत्र दे दिया था। 1972 में जबलपुर में निजी औषधालय खोलकर पीड़ित मानवता की सेवा की यात्रा शुरू की थी। 52 साल से अधिक समय की निजी प्रैक्टिस में वे मरीजों से 20 रुपये तक ही फीस ले पाए। मात्र दो रुपये फीस लेकर उन्होंने वर्षों तक मरीजों की सेवा की। उन्हें 2019 में पद्मभूषण के लिए नामांकित किया गया था। डा. डावर बताते हैं कि औषधालय शुरू करते समय जो टेबल कुर्सी व मरीजों के लिए पलंग खरीदा था अब भी उसी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
जरूरतमंद मरीजों को अपनी तरफ से कराते है दवाएं उपलब्ध
डा. डावर ने बताया कि मरीज परेशानी में आता है, जिसके चेहरे पर मुस्कान लाकर संतोष मिलता है। कम आमदनी में भी वे अच्छा जीवन व्यतीत कर रहे हैं। डा. डावर के औषधालय पर कई बार मरीजों की संख्या 200 के पार निकल जाती है। इनमें से कुछ मरीज ऐसे भी रहते हैं जिनसे डा. डावर फीस के 20 रुपये भी नहीं लेते। जरूरतमंद मरीजों को अपनी तरफ से दवाएं भी उपलब्ध कराते हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पद्मश्री मिलने पर डा. एमसी डावर को शुभकामनाएं दी हैं।
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