नई दिल्ली।भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से दोनों देशों के रिश्तों का संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (रिटायर्ड) ने कहा है कि गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद के घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि चीन के साथ सीमा विवाद का समाधान केवल सैन्य ताकत के जरिए नहीं निकाला जा सकता। उनके मुताबिक, इस अनुभव ने बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से विवाद सुलझाने की प्रक्रिया को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
सीमा विवाद और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर में अंतर
जनरल नरवणे ने भारत-चीन सीमा की स्थिति पर बात करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़ा विवाद अब भी पूरी तरह सुलझा नहीं है। उन्होंने ‘बाउंड्री’ शब्द का इस्तेमाल करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सीमा आम तौर पर स्पष्ट रूप से निर्धारित और मान्यता प्राप्त होती है, जबकि विवादित सीमा क्षेत्रों की स्थिति इतनी स्पष्ट नहीं होती।
उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण और सीमा की स्थिति को लेकर मतभेद हैं, वहां तनाव और टकराव की आशंका बनी रह सकती है। नरवणे ने गलवान घाटी की घटना को ऐसे ही विवादित क्षेत्रों में होने वाले टकराव का उदाहरण बताया।
गलवान के बाद सैन्य समाधान की सीमाएं हुईं स्पष्ट
पूर्व सेना प्रमुख के मुताबिक, गलवान झड़प के बाद हुए घटनाक्रम से यह समझने में मदद मिली कि चीन के साथ सीमा विवाद को केवल सैन्य कार्रवाई से सुलझाना व्यावहारिक विकल्प नहीं है। उन्होंने बातचीत और संवाद को विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि सीमा पर सैन्य तैयारियां अपनी जगह जरूरी हैं, लेकिन लंबे समय से चले आ रहे विवाद का स्थायी समाधान निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी आवश्यक हैं। दोनों देशों के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए बातचीत की प्रक्रिया जारी रहना महत्वपूर्ण है।
एकतरफा बल प्रयोग के खिलाफ भारत का रुख
नरवणे ने कहा कि भारत ने सीमाओं में बदलाव के लिए एकतरफा तरीके से बल प्रयोग किए जाने के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट किया है। उनके अनुसार, इस सिद्धांत ने विवाद के समाधान में बातचीत की भूमिका को और महत्वपूर्ण बनाया है। भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कम करने तथा लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए सैन्य और राजनयिक स्तर पर संवाद की व्यवस्था महत्वपूर्ण बनी हुई है। नरवणे ने दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत को भी इसी संदर्भ में अहम बताया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति का किया जिक्र
जनरल नरवणे ने गलवान की घटना के बाद भारत की वैश्विक स्थिति पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम के बाद सैन्य, राजनयिक और राजनीतिक स्तर पर भारत की साख मजबूत हुई है।
उनकी टिप्पणी के मुताबिक, गलवान झड़प ने भारत-चीन संबंधों में सीमा विवाद की गंभीरता को उजागर किया और इसके समाधान के लिए बातचीत की आवश्यकता को रेखांकित किया। हालांकि, दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े सभी मतभेद अब भी समाप्त नहीं हुए हैं। ऐसे में आगे की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए विवादित मुद्दों को किस तरह सुलझाते हैं।