नई दिल्ली - देश में बदलाव लाने और अपनी आवाज उठाने के तरीकों को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने युवाओं को एक खास संदेश दिया है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपनी पहचान को ‘Gen Z’ तक सीमित न रखें, बल्कि खुद को ‘अमृत पीढ़ी’ के रूप में देखें। लेखी के मुताबिक, युवाओं को अपनी ऊर्जा विरोध-प्रदर्शनों के बजाय देश के विकास और निर्माण में लगानी चाहिए।
‘सिर्फ धरना देने से नहीं बदलेगा देश’
मीनाक्षी लेखी ने हालिया विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि केवल सड़कों पर उतरने या धरना देने से देश में बदलाव नहीं लाया जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दुनिया की नजर भारत पर है, तो धरना-प्रदर्शन के जरिए माहौल बनाने की जरूरत क्यों है? उन्होंने यह भी कहा कि महज 500 लोगों के इकट्ठा होने से देश नहीं बदल सकता।
लेखी के बयान में युवाओं से देश की प्रगति में सक्रिय योगदान देने की अपील प्रमुख रही। हालांकि, उनके विचार विरोध-प्रदर्शनों की भूमिका और बदलाव के तरीकों को लेकर एक खास दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं।
‘Gen Z’ के बजाय ‘अमृत पीढ़ी’ नाम अपनाने की अपील
मीनाक्षी लेखी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपनी पहचान के लिए दूसरों की ओर से दिए गए लेबल पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “दूसरों को खुद पर कोई लेबल लगाने न दें। मैं चाहती हूं कि आप ‘जेन जेड’ शब्द को खारिज करें। आप ‘अमृत पीढ़ी’ हैं।”
उनकी इस अपील का उद्देश्य युवाओं को देश के भविष्य से जोड़कर देखने और उन्हें विकास की प्रक्रिया में भागीदारी के लिए प्रेरित करना था। लेखी ने युवाओं की भूमिका को केवल विरोध जताने तक सीमित रखने के बजाय राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर जोर दिया।
युवा सम्मेलन में दिया संदेश
मीनाक्षी लेखी ने ये बातें इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल (NIRC) की ओर से आयोजित युवा सम्मेलन में कहीं। इस सम्मेलन का विषय था- ‘विकसित भारत के लिए जेन Z को तैयार करना’।
कार्यक्रम में छात्रों के बीच युवाओं की पहचान, उनकी जिम्मेदारियों और देश के विकास में उनकी भागीदारी जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। लेखी ने अपने संबोधन में युवाओं से अपनी क्षमता और ऊर्जा का इस्तेमाल भारत की प्रगति के लिए करने का आह्वान किया।
उनके बयान ने इस सवाल को भी चर्चा में ला दिया है कि देश में बदलाव लाने के लिए युवा आंदोलन, सार्वजनिक विरोध और विकास कार्यों में भागीदारी के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाए।