नई दिल्ली- करीब दो साल तक शांत रहने के बाद भारत में कोविड-19 संक्रमण एक बार फिर चर्चा में है। आंध्र प्रदेश में ओमिक्रॉन के नए सब-वेरिएंट RF.5 की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। राज्य में अब तक 16 कोविड-19 मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें चार सैंपलों में जीनोम सीक्वेंसिंग के जरिए RF.5 वैरिएंट की पहचान की गई है।
आंध्र प्रदेश में मिले RF.5 के मामले
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कडप्पा जिले से मिले चार संक्रमित सैंपलों को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए पुणे की वायरोलॉजी लैब भेजा गया था। जांच में इन सभी में ओमिक्रॉन के RF.5 सब-वेरिएंट की पुष्टि हुई। राज्य में अब तक 16 संक्रमित और चार मौतों की जानकारी सामने आई है।
क्या पहले से ज्यादा खतरनाक है RF.5?
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। RF.5 ओमिक्रॉन परिवार का ही एक नया सब-लाइनिएज है। अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है कि यह पहले के ओमिक्रॉन वैरिएंट्स की तुलना में अधिक गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने या मौत का जोखिम बढ़ाता है।
WHO भी रख रहा है नजर
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी RF.5 वैरिएंट की निगरानी कर रहा है। यह वैरिएंट पहले सिंगापुर और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों में भी पाया जा चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका व्यवहार अब तक पहले के ओमिक्रॉन वैरिएंट्स जैसा ही देखा गया है।
कैसे विकसित हुआ RF.5?
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक RF.5 कोई रिकॉम्बिनेंट वैरिएंट नहीं है। यह वायरस प्राकृतिक रूप से विकसित हुआ है और वैज्ञानिकों के अनुसार JN.1 वैरिएंट से LF.7 और PY.1.1.1 के जरिए विकसित होकर RF.5 बना है।
सावधानी बरतने की सलाह
विशेषज्ञों ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है। सर्दी, खांसी या बुखार जैसे लक्षण होने पर जांच कराएं, भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।