MP UCC News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई विशेष कैबिनेट बैठक में मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। जगदीशपुर स्थित चमन महल में हुई इस बैठक में सरकार ने UCC को लेकर कई अहम प्रावधानों पर मुहर लगाई। अब इस विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए जाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य प्रदेश में सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनता से सुझाव लेने के बाद इस कानून का ड्राफ्ट तैयार किया है।
UCC को लेकर जनता से लिए गए सुझाव, लाखों लोगों ने दी राय
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि समान नागरिक संहिता को लेकर प्रदेशभर में जनसंवाद किया गया। सरकार के अनुसार, करीब 10 लाख लोगों से सुझाव लिए गए और बड़ी संख्या में लोगों ने कानून लागू करने का समर्थन किया। सीएम ने कहा कि UCC को लेकर 3 करोड़ से ज्यादा संदेश भेजे गए और बड़ी संख्या में लोगों ने समान कानून की आवश्यकता पर सहमति जताई। उन्होंने इसे सभी नागरिकों को समान अधिकार देने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
मध्यप्रदेश बनेगा UCC लागू करने वाला चौथा राज्य
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का चौथा राज्य होगा जहां समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इससे पहले गोवा में लंबे समय से समान नागरिक कानून लागू है। इसके बाद उत्तराखंड और गुजरात में भी UCC को लेकर कानून बनाया गया है। अब मध्यप्रदेश सरकार विधानसभा के माध्यम से इसे लागू करने की तैयारी कर रही है।
पूर्व जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में बनी थी समिति
UCC का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता में समिति बनाई गई थी। समिति ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जाकर लोगों से सुझाव लिए। सरकार के मुताबिक, 51 जिलों में जनपरामर्श बैठकें आयोजित की गईं और इसके बाद ड्राफ्ट तैयार किया गया।
UCC में एक विवाह व्यवस्था का प्रावधान
प्रस्तावित समान नागरिक संहिता में विवाह को लेकर भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसके तहत एक समय में एक ही विवाह को मान्यता देने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा विवाह और तलाक दोनों का पंजीयन अनिवार्य होगा। हालांकि, रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा। शहरी क्षेत्रों में विवाह पंजीयन की प्रक्रिया MP ई-नगर पालिका पोर्टल के माध्यम से होगी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में SDM, पंचायत या नगरपालिका स्तर पर व्यवस्था की जाएगी।
लिव-इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी
UCC के सबसे चर्चित प्रावधानों में लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीयन शामिल है। नए कानून के तहत लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यदि कोई कपल बिना पंजीयन के एक महीने से अधिक समय तक लिव-इन में रहता है तो कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। इसमें 3 महीने तक की जेल या 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। गलत जानकारी देने पर भी दंड का प्रावधान रखा गया है।
लिव-इन से जन्मे बच्चों को मिलेगा समान अधिकार
प्रस्तावित कानून में लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों को भी वैध संतान का दर्जा देने का प्रावधान है। ऐसे बच्चों को उत्तराधिकार समेत सभी कानूनी अधिकार मिलेंगे। साथ ही सरोगेसी और ART तकनीक से जन्मे बच्चों को भी समान दर्जा देने की व्यवस्था की गई है।
उत्तराधिकार में बेटा-बेटी को समान अधिकार
UCC के तहत संपत्ति के उत्तराधिकार में जेंडर समानता पर जोर दिया गया है। इसके अनुसार बेटों और बेटियों को संपत्ति में बराबर अधिकार मिलेगा। विधवा और विधुर दोनों को समान अधिकार दिए जाएंगे। जीवित माता-पिता को भी उत्तराधिकार की श्रेणी में शामिल किया गया है।
वसीयत को लेकर बड़ा बदलाव
नई व्यवस्था में वयस्क व्यक्ति को अपनी संपत्ति को लेकर अधिक स्वतंत्रता दी गई है। प्रस्ताव के अनुसार कोई भी व्यक्ति अपनी स्वयं अर्जित और पैतृक संपत्ति को वसीयत के माध्यम से किसी को भी दे सकता है।
निकाह हलाला जैसी प्रथा पर सख्ती
प्रस्तावित UCC में तलाक के बाद दोबारा विवाह के लिए निकाह हलाला जैसी शर्तों को अपराध की श्रेणी में रखने का प्रावधान किया गया है। किसी व्यक्ति को ऐसी प्रक्रिया के लिए मजबूर करना या बढ़ावा देना दंडनीय अपराध माना जाएगा।
जनजातीय समुदायों को UCC से रखा गया बाहर
सरकार ने संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखा है। भील, गोंड, कोरकू, बैगा, सहरिया और भारिया जैसी जनजातियों पर यह कानून लागू नहीं होगा। इसके अलावा संविधान के विशेष प्रावधानों के तहत संरक्षित समुदायों को भी इससे छूट दी गई है।
कांग्रेस पर सीएम मोहन यादव का हमला
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार ने सभी राजनीतिक दलों और आम लोगों से सुझाव मांगे थे। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से सुझाव आए, लेकिन कांग्रेस की ओर से कोई सुझाव नहीं दिया गया।
विधानसभा मानसून सत्र में पेश होगा बिल
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब सरकार समान नागरिक संहिता विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में पेश करेगी। सरकार की योजना है कि चर्चा के बाद इसे कानून का रूप दिया जाए।