मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। जून में देर से दस्तक देने और जुलाई के दूसरे सप्ताह में कमजोर पड़ने के कारण प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाली नई मौसम प्रणाली के प्रभाव से 20 जुलाई के बाद प्रदेश में फिर से अच्छी बारिश का दौर शुरू हो सकता है।
मानसून की धीमी चाल से बढ़ी चिंता
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 9.7 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक सामान्य रूप से 11.4 इंच वर्षा हो जानी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में लगभग 15 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है। इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 24 जून को मध्य प्रदेश में प्रवेश किया, जो सामान्य तिथि की तुलना में करीब 9 दिन देर से था। मानसून की देरी का असर जून महीने की बारिश पर भी दिखाई दिया और पूरे महीने सामान्य से लगभग 30 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई।
जुलाई की शुरुआत में बढ़ी रफ्तार, फिर कमजोर पड़ा मानसून
जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून सक्रिय होने से प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई और लगा कि बारिश का आंकड़ा सामान्य स्तर पर पहुंच जाएगा। हालांकि, दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ गया, जिससे अधिकांश जिलों में बारिश की गतिविधियां काफी कम हो गईं। बारिश कम होने के कारण कई क्षेत्रों में तापमान और उमस फिर बढ़ने लगी है। वहीं कृषि कार्यों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि खरीफ फसलों के लिए जुलाई का महीना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
आज इन जिलों में बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार रविवार को रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी और सिंगरौली जिलों में मध्यम बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा इंदौर, रायसेन, धार, झाबुआ, खंडवा, बैतूल, नर्मदापुरम, जबलपुर, सतना सहित कुल 23 जिलों में हल्की बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। कुछ स्थानों पर तेज हवाएं भी चलने की संभावना जताई गई है।
39 जिलों में सामान्य से कम बारिश
प्रदेश के 39 जिलों में अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। इनमें रीवा, सतना, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सागर, रायसेन, विदिशा, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, बैतूल और शिवपुरी जैसे जिले प्रमुख हैं, जहां बारिश की कमी स्पष्ट रूप से महसूस की जा रही है। कम बारिश के कारण कई क्षेत्रों में जल स्रोतों का स्तर भी प्रभावित होने लगा है। किसानों की चिंता इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि धान, सोयाबीन और मक्का जैसी खरीफ फसलों को इस समय नियमित बारिश की आवश्यकता होती है।
इन जिलों में सामान्य या बेहतर रही बारिश
दूसरी ओर भोपाल, इंदौर, उज्जैन, देवास, सीहोर, हरदा, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, राजगढ़, नीमच और मंदसौर सहित 16 जिलों में अब तक सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश में सबसे अधिक करीब 17.9 इंच वर्षा देवास जिले में रिकॉर्ड की गई है, जबकि अलीराजपुर सबसे पीछे है, जहां अब तक केवल 2.3 इंच बारिश हुई है।
नदियों और जलाशयों का घटने लगा जलस्तर
पिछले कई दिनों से अधिकांश हिस्सों में बारिश नहीं होने के कारण प्रदेश की नदियों, तालाबों और जलाशयों का जलस्तर धीरे-धीरे कम होने लगा है। यदि अगले कुछ दिनों तक पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो सिंचाई और पेयजल व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है। जल संसाधन विभाग लगातार प्रमुख बांधों और जलाशयों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
20 जुलाई के बाद फिर सक्रिय होगा मानसून
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 20 से 22 जुलाई के बीच बंगाल की खाड़ी में एक नया लो-प्रेशर सिस्टम बनने की संभावना है। इस प्रणाली के प्रभाव से मध्य प्रदेश में मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है। यदि यह सिस्टम अपेक्षित रूप से मजबूत हुआ, तो प्रदेश के मध्य, पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में व्यापक बारिश होने की संभावना है। इससे बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है और किसानों के साथ-साथ आम लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
कृषि और जल संसाधनों के लिए अहम होगा अगला सप्ताह
विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई का अंतिम पखवाड़ा मध्य प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। यदि इस दौरान अच्छी बारिश होती है तो खरीफ फसलों की स्थिति सुधरेगी, जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ेगा और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा का घाटा भी काफी हद तक कम हो सकता है। वहीं यदि मानसून फिर कमजोर पड़ा तो कई जिलों में कृषि और जल प्रबंधन की चुनौती और बढ़ सकती है।