अयोध्या - अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर स्वतंत्र जांच की मांग की है। दोनों नेताओं ने ट्रस्ट के वित्तीय मामलों में पारदर्शिता लाने की बात कहते हुए ट्रस्ट के खातों को सार्वजनिक करने और दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है।
राहुल-खड़गे ने उठाए जवाबदेही के सवाल
शनिवार को लिखे गए पत्र में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि ट्रस्ट के खाते सार्वजनिक किए जाएं, ताकि श्रद्धालु जान सकें कि उनके चढ़ावे का उपयोग कहां और कैसे किया गया। साथ ही जांच में जो भी जिम्मेदार पाए जाएं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
PM मोदी की चुप्पी पर सवाल
पत्र में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संसद में ट्रस्ट के गठन की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी, जबकि ट्रस्ट के सदस्यों की नियुक्ति सरकार की ओर से की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के कई सदस्य आरएसएस और वीएचपी से जुड़े रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की चुप्पी स्वीकार्य नहीं है और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
आरोपी टिन्नू से पूछताछ जारी
उधर, चढ़ावा चोरी मामले के मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसके भतीजे मनीष की पुलिस कस्टडी का रविवार को अंतिम दिन है। दोनों से एसओजी कार्यालय में लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने टिन्नू के घर से 1 लाख रुपये और मनीष के घर से 2 लाख रुपये बरामद किए थे। इससे पहले छह अन्य आरोपियों से भी रिमांड के दौरान पूछताछ की जा चुकी है।
संत समाज की प्रतिक्रिया
तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि यदि ट्रस्ट में वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि ट्रस्ट का पुनर्गठन होता है तो उसमें INDIA गठबंधन से जुड़े किसी व्यक्ति को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
ट्रस्ट ने क्या कहा?
राम मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, निधि समर्पण अभियान और कॉर्पस डोनेशन से अब तक 3,264 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 2,370 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण और अन्य कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं। ट्रस्ट का कहना है कि कानूनी जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं है।