खड़गपुर: लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पश्चिम मेदिनीपुर और झारग्राम जिले के हजारों लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कंसाबती नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से आमदई-कनकाबती फेरीघाट को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग और वर्षों पुराना बांस का पुल पूरी तरह पानी में डूब गया है। इसके साथ ही दोनों जिलों के बीच का महत्वपूर्ण ग्रामीण संपर्क मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है।
हजारों लोगों की आवाजाही प्रभावित
प्रतिदिन इस पुल के जरिए झारग्राम प्रखंड की 5 से 7 ग्राम पंचायतों और पश्चिम मेदिनीपुर जिले की 2 से 3 ग्राम पंचायतों के हजारों लोग आवागमन करते हैं। छात्र-छात्राएं, सरकारी और निजी कर्मचारी, छोटे व्यापारी, किसान और मरीजों के लिए यह सबसे सुविधाजनक और कम दूरी वाला रास्ता था। पुल डूबने के बाद लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
नाव सेवा भी नहीं बन सकी समाधान
स्थिति को देखते हुए फेरीघाट प्रशासन ने नाव सेवा शुरू करने का प्रयास किया, लेकिन नदी में पर्याप्त गहराई नहीं होने के कारण नावों का संचालन भी सुचारु रूप से नहीं हो पा रहा है। इससे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि कई लोगों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। इससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त बर्बादी हो रही है।
विद्यार्थियों और मरीजों पर सबसे ज्यादा असर
इस स्थिति का सबसे अधिक असर विद्यार्थियों पर पड़ा है। विद्यासागर विश्वविद्यालय और विभिन्न कॉलेजों में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं अस्पताल, सरकारी कार्यालय, बाजार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए मेदिनीपुर शहर जाने वाले लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हर साल दोहराई जाती है समस्या
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष मानसून के दौरान यही स्थिति बनती है। बांस का पुल पानी में डूब जाता है और दोनों जिलों का संपर्क लगभग टूट जाता है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार करने को मजबूर होते हैं, लेकिन आज तक इस स्थान पर स्थायी पुल का निर्माण नहीं हो सका है।
स्थायी पुल की मांग तेज
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने और आमदई-कनकाबती फेरीघाट पर स्थायी पुल के निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हर वर्ष हजारों लोगों को इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। वहीं कंसाबती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से लोगों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।