भारत की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ सहेजने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। कोलकाता स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय परिसर में देश का पहला बहुभाषी संग्रहालय ‘म्यूजियम ऑफ वर्ड’ (शब्दलोक) आम लोगों के लिए खोला जाएगा। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह रविवार को इसका उद्घाटन करेंगे। यह संग्रहालय भारतीय भाषाओं की हजारों वर्षों की यात्रा, उनके विकास और सांस्कृतिक प्रभाव को एक ही स्थान पर प्रदर्शित करेगा।
देश का पहला बहुभाषी संग्रहालय बनेगा 'शब्दलोक'
कोलकाता के ऐतिहासिक राष्ट्रीय पुस्तकालय परिसर में स्थित बेल्वेडियर हाउस अब केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं रहेगा, बल्कि भारत की भाषाई विरासत का जीवंत केंद्र बनेगा। 'शब्दलोक' ऐसा पहला संग्रहालय होगा, जहां भारत की विविध भाषाओं, लिपियों, ध्वनियों और साहित्यिक परंपराओं को वैज्ञानिक और डिजिटल माध्यमों से प्रस्तुत किया जाएगा। इस संग्रहालय का उद्देश्य भाषा को केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक विकास का आधार बताना है।
11वीं सदी के ताम्रपत्र से लेकर आधुनिक होलोग्राम तक का अनूठा सफर
'शब्दलोक' में आगंतुक भारतीय भाषाओं के विकास को हजारों वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा के रूप में देख सकेंगे। यहां 11वीं सदी के ताम्रपत्र, प्राचीन पांडुलिपियां, दुर्लभ ग्रंथ, पारंपरिक लिपियां, शिलालेख, मुद्रित पुस्तकें और आधुनिक होलोग्राफिक तकनीक के माध्यम से भाषा के विकास को प्रदर्शित किया जाएगा। संग्रहालय में इंटरैक्टिव डिजिटल डिस्प्ले, ऑडियो-विजुअल गैलरी और मल्टीमीडिया प्रेजेंटेशन के जरिए यह दिखाया जाएगा कि किस प्रकार भारतीय भाषाएं समय के साथ विकसित हुईं और उन्होंने देश की सांस्कृतिक पहचान को आकार दिया।
भाषा को जीवंत सांस्कृतिक इकाई के रूप में समझने का अवसर
इस संग्रहालय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भाषा को केवल पढ़ने या सुनने की वस्तु नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक इकाई के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। आगंतुक यह जान सकेंगे कि विभिन्न भाषाएं कैसे एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं, किस प्रकार नई बोलियां जन्म लेती हैं और किस तरह भाषा समाज, साहित्य, विज्ञान और ज्ञान परंपरा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पीएम मोदी की परिकल्पना से साकार हुआ 'शब्दलोक'
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की परिकल्पना वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इसका उद्देश्य भारत की बहुभाषी विरासत को संरक्षित करना और नई पीढ़ी को अपनी भाषाई जड़ों से जोड़ना है। यह संग्रहालय भारत की मौखिक परंपराओं, लोक भाषाओं, शास्त्रीय भाषाओं और आधुनिक भारतीय भाषाओं के विकास को ऐतिहासिक प्रमाणों के साथ प्रस्तुत करेगा।
41 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा संग्रहालय
'शब्दलोक' परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 41 करोड़ रुपये है। पहले चरण का कार्य पूरा हो चुका है, जिस पर करीब 14 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। शेष दो चरणों पर तेजी से काम जारी है, जिनमें संग्रहालय की डिजिटल गैलरियों और इंटरैक्टिव प्रदर्शनों का विस्तार किया जाएगा।
राष्ट्रीय पुस्तकालय का ऐतिहासिक महत्व
कोलकाता का राष्ट्रीय पुस्तकालय भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक पुस्तकालय माना जाता है। इसकी स्थापना 19वीं सदी में हुई थी और आज यहां लाखों दुर्लभ पुस्तकें, पांडुलिपियां और ऐतिहासिक दस्तावेज सुरक्षित हैं। इसी ऐतिहासिक परिसर में 'शब्दलोक' की स्थापना भारत की ज्ञान परंपरा को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अमित शाह रखेंगे दुनिया की सबसे बड़ी दही यूनिट की आधारशिला
कोलकाता दौरे के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह हावड़ा के संकराइल फूड पार्क में अमूल के लगभग 650 करोड़ रुपये की लागत वाले मेगा डेयरी प्लांट की भी आधारशिला रखेंगे। इसे दुनिया की सबसे बड़ी दही उत्पादन इकाई बताया जा रहा है। यह संयंत्र प्रतिदिन 15 लाख लीटर दूध का प्रसंस्करण करेगा और लगभग 10 लाख किलोग्राम दही का उत्पादन करने में सक्षम होगा।
बंगाल के डेयरी सेक्टर को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन
इस आधुनिक डेयरी प्लांट में दही के अलावा पनीर, लस्सी, मक्खन, घी और आइसक्रीम का भी उत्पादन किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से पश्चिम बंगाल के डेयरी उद्योग को नई गति मिलेगी, किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलेगा तथा हजारों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत को मिलेगा नया आयाम
'शब्दलोक' संग्रहालय और अमूल की मेगा डेयरी परियोजना, दोनों ही भारत की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक विकास को नई दिशा देने वाले महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। जहां एक ओर 'शब्दलोक' देश की भाषाई पहचान को संरक्षित करेगा, वहीं आधुनिक डेयरी परियोजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारिता आंदोलन को मजबूती प्रदान करेगी।