20 जुलाई से शुरू होने जा रहे संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टक्कर देखने को मिल सकती है। एक ओर केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर विपक्ष NEET-UG पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी, सोनम वांगचुक और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। बदले हुए राजनीतिक समीकरणों और कई सांसदों के पाला बदलने के कारण यह सत्र और भी दिलचस्प रहने वाला है।
20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र सोमवार, 20 जुलाई से शुरू होकर कई महत्वपूर्ण विधायी और राजनीतिक मुद्दों का गवाह बनेगा। सरकार की प्राथमिकता लंबित विधेयकों को पारित कराना है, जबकि विपक्ष जनहित और विवादित मामलों को लेकर संसद में सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है। संसद के दोनों सदनों में इस बार कई अहम विधेयकों पर चर्चा होने की संभावना है और हंगामे के भी पूरे आसार हैं।
सरकार का फोकस सात अहम विधेयकों पर
भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की कोशिश इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की होगी। इनमें प्रमुख रूप से—
आयकर संशोधन विधेयक
- राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक
- सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक
- अन्य प्रशासनिक एवं आर्थिक सुधारों से जुड़े विधेयक
- सरकार का कहना है कि इन विधेयकों से न्याय व्यवस्था, प्रशासनिक सुधार और आर्थिक प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
विपक्ष के निशाने पर होंगे ये बड़े मुद्दे
मानसून सत्र में विपक्ष सरकार को कई संवेदनशील मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। इनमें सबसे प्रमुख NEET-UG पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी, महंगाई, बेरोजगारी, कृषि और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल हैं। विपक्ष शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, युवाओं के भविष्य और सरकारी जवाबदेही को लेकर सरकार से विस्तृत चर्चा की मांग करेगा।
संविधान संशोधन विधेयकों पर भी नजर
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार इस सत्र के दौरान उन संविधान संशोधन विधेयकों को भी आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकती है, जो पहले पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के कारण पारित नहीं हो पाए थे। इनमें लोकसभा सीटों के परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव और महिला आरक्षण से संबंधित प्रावधानों पर आगे की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा की संभावना जताई जा रही है। हालांकि फिलहाल इन्हें आधिकारिक विधायी एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है।
बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच शुरू होगा सत्र
इस बार संसद का मानसून सत्र बदले हुए राजनीतिक माहौल में शुरू हो रहा है। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के कुछ बागी सांसद अब राजग के साथ आ चुके हैं। ऐसे में संसद के भीतर सत्ता और विपक्ष की संख्या तथा राजनीतिक रणनीतियों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
NEET पेपर लीक को लेकर संसद तक मार्च
सोमवार को 'काकरोच जनता पार्टी (CJP)' द्वारा संसद की ओर मार्च का भी कार्यक्रम प्रस्तावित है। संगठन पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। यह प्रदर्शन संसद सत्र के दौरान राजनीतिक माहौल को और गर्मा सकता है।
सोनम वांगचुक का मुद्दा भी गरमाएगा सत्र
जंतर-मंतर पर धरना दे रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य संबंधी कारणों से शनिवार को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया। विपक्ष इस मुद्दे को भी संसद में उठाने की तैयारी कर रहा है और सरकार से कार्रवाई पर जवाब मांगेगा।
क्या रहेगा इस सत्र का सबसे बड़ा एजेंडा?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इस बार संसद का मानसून सत्र केवल विधेयकों तक सीमित नहीं रहेगा। शिक्षा, न्याय, संवैधानिक सुधार, युवाओं के मुद्दे, विपक्ष की एकजुटता और आगामी चुनावों की राजनीतिक रणनीति भी सदन की कार्यवाही में साफ दिखाई दे सकती है। सरकार जहां विकास और विधायी सुधारों का संदेश देना चाहेगी, वहीं विपक्ष जनसरोकार से जुड़े मुद्दों के जरिए सरकार को घेरने की कोशिश करेगा।