वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) और मॉर्गन स्टैनली की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय परिवारों के पास लगभग 34,600 टन सोना जमा है। यह मात्रा दुनिया के सभी केंद्रीय बैंकों के सोने के भंडार से भी अधिक है। यह विश्व के कुल उपलब्ध सोने का लगभग 11 से 13 प्रतिशत हिस्सा माना जाता है, जो भारत को वैश्विक ‘गोल्ड पावरहाउस’ बनाता है।
अमेरिका और चीन की तुलना में भारत का सोना
यदि तुलना की जाए तो भारतीय परिवारों के पास जितना सोना है, वह अमेरिका के भंडार से लगभग 4 गुना और चीन से लगभग 10 गुना अधिक है। अमेरिका के पास जहां लगभग 8,133 टन सोना है, वहीं चीन की आधिकारिक गोल्ड रिज़र्व क्षमता करीब 2,235 टन के आसपास है। यह आंकड़े दिखाते हैं कि भारत की घरेलू सोने की संपत्ति किस हद तक दुनिया में अद्वितीय है।
सोने का आर्थिक महत्व और बढ़ती कीमते
पिछले एक वर्ष में सोने की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है, जिसके चलते भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की कुल वैल्यू लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। यह राशि भारतीय अर्थव्यवस्था की कुल जीडीपी यानी 4.1 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक है। सोने और चांदी के मजबूत होते भाव ने गोल्ड ईटीएफ, ज्वेलरी और बुलियन में निवेश को और तेज कर दिया है।
सोना: भारतीय संस्कृति और सुरक्षा का प्रतीक
भारत में सोना केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि पीढ़ियों से आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। शादियों, त्योहारों, पारिवारिक आयोजनों से लेकर आपातकालीन बचत तक, सोना भारतीय जीवन का अभिन्न हिस्सा है। यही कारण है कि आर्थिक अस्थिरता के दौर में भी भारत का घरेलू सोना एक मजबूत स्तंभ की तरह आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है।
गोल्ड रिज़र्व और भविष्य की संभावनाए
वैश्विक भू-राजनेतिक तनाव और डॉलर की कमजोरी के बीच आने वाले समय में सोने की मांग और भी बढ़ सकती है। भारतीय घरों में जमा सोना न केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी आर्थिक मजबूती का संकेत देता है। भविष्य में यदि गोल्ड मोनेटाइजेशन योजनाएँ अधिक सफल होती हैं, तो यह सोना देश की अर्थव्यवस्था के लिए और भी बड़ा संसाधन बन सकता है।
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