भारत और मलेशिया के बीच संबंध केवल राजनयिक नहीं, बल्कि सदियों पुराने सांस्कृतिक और मानवीय संपर्कों से समृद्ध हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वक्तव्य में यह रेखांकित किया कि दोनों देश समुद्री पड़ोसी होने के साथ-साथ साझा विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े हुए हैं। मलेशिया में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी इन संबंधों की नींव को और मजबूत बनाती है, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा सहज रूप से विस्तृत होता है।
आतंकवाद पर भारत का बेबाक संदेश और वैश्विक अपेक्षाएँ
प्रधानमंत्री का यह कथन कि ‘‘आतंकवाद पर हमारा संदेश स्पष्ट है; कोई दोहरा मापदंड नहीं, कोई समझौता नहीं’’ आज के वैश्विक परिदृश्य में भारत की निर्णायक नीति को दर्शाता है। यह संदेश केवल मलेशिया के लिए नहीं, बल्कि उन सभी देशों के लिए है जो आतंकवाद को किसी राजनीतिक या कूटनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करते हैं। भारत यह मानता है कि आतंकवाद मानवता का शत्रु है और इसके विरुद्ध एक जैसी कठोर और पारदर्शी नीति हर राष्ट्र की जिम्मेदारी है।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा में व्यापक सहयोग का नया अध्याय
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि भारत और मलेशिया आतंकवाद विरोधी उपायों, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान तथा समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करेंगे। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सामरिक महत्व को देखते हुए यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के हितों की रक्षा करेगी, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और शांति की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी। रक्षा संबंधों को अधिक व्यापक बनाने की दिशा में उठाए जा रहे कदम दोनों देशों के रणनीतिक संकल्प को परिभाषित करते हैं।
आर्थिक, तकनीकी और डिजिटल क्षेत्रों में उभरता मजबूत साझेदारी ढांचा
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सेमीकंडक्टर विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे नए क्षेत्रों में मलेशिया के साथ सहयोग को अगले स्तर पर ले जाएगा। यह सहयोग न केवल दोनों अर्थव्यवस्थाओं की क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य की तकनीकी दुनिया में भारत–मलेशिया साझेदारी को निर्णायक रूप से स्थापित करेगा। यह आर्थिक साझेदारी नौकरी, नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी मजबूती प्रदान करेगी।
हिंद–प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका और साझा लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने हिंद–प्रशांत क्षेत्र को विश्व विकास का नया इंजन बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार, रणनीतिक संतुलन और भू–राजनीतिक संरचना के केंद्र में तेजी से उभर रहा है। भारत की ‘इंडो–पैसिफिक’ नीति खुलापन, संवाद, स्थिरता और नियम–आधारित व्यवस्था पर आधारित है। मलेशिया के साथ सहयोग बढ़ने से इस क्षेत्र में शांतिपूर्ण, संतुलित और प्रगतिशील व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
भारत का दृढ़ रुख और वैश्विक नेतृत्व
भारत और मलेशिया के बीच हुई यह बातचीत केवल bilateral steps का हिस्सा नहीं, बल्कि उस व्यापक विश्वदृष्टि का प्रतीक है जिसमें भारत आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक नेतृत्व लेते हुए वैश्विक शांति और विकास की दिशा में नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का संदेश स्पष्ट है कि चाहे सुरक्षा का प्रश्न हो, तकनीकी विकास का या भू–राजनीतिक संतुलन का—भारत किसी भी समझौते या दोहरे मानदंड को स्वीकार नहीं करेगा, बल्कि अपनी नीतियों में दृढ़ता और पारदर्शिता को सर्वोच्च महत्व देता रहेगा।
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