नई दिल्ली. भारत ने उन्नत अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण करके वैश्विक रक्षा जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह परीक्षण ओडिशा स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। इस मिसाइल में अत्याधुनिक MIRV तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे एक साथ कई अलग-अलग लक्ष्यों को भेदने की क्षमता प्रदान करती है। इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास ऐसी उन्नत रणनीतिक तकनीक मौजूद है।
क्या है MIRV तकनीक?
MIRV तकनीक आधुनिक मिसाइल प्रणाली की सबसे उन्नत तकनीकों में मानी जाती है। इस तकनीक की मदद से एक ही बैलिस्टिक मिसाइल कई स्वतंत्र पेलोड लेकर अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला कर सकती है। सरल शब्दों में समझें तो एक मिसाइल हवा में पहुंचने के बाद कई हिस्सों में विभाजित होकर अलग-अलग दिशाओं में स्थित लक्ष्यों को निशाना बना सकती है। इससे दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए हमले को रोकना बेहद कठिन हो जाता है।
‘मिशन दिव्यास्त्र’ क्यों है खास
रक्षा सूत्रों के अनुसार यह परीक्षण मिशन दिव्यास्त्र के तहत किया गया। इसका उद्देश्य अग्नि-5 मिसाइल में शामिल MIRV तकनीक की क्षमता और सटीकता का परीक्षण करना था। माना जा रहा है कि यह परीक्षण भारत की दीर्घ दूरी की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। पिछले वर्ष भी अग्नि-5 का MIRV प्रणाली के साथ परीक्षण किया गया था, लेकिन इस बार परीक्षण को अधिक उन्नत और व्यापक माना जा रहा है।
कई पेलोड के साथ किया गया परीक्षण
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि मिसाइल का परीक्षण कई पेलोड के साथ किया गया और हिंद महासागर क्षेत्र में फैले विभिन्न लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार यह परीक्षण केवल तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक तैयारी और लंबी दूरी की मारक क्षमता का भी प्रदर्शन है। इससे भारत की प्रतिरोधक क्षमता को नई मजबूती मिलने की बात कही जा रही है।
अग्नि-5 क्यों मानी जाती है बेहद अहम
अग्नि-5 भारत की सबसे उन्नत लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों में शामिल है। इसकी मारक क्षमता हजारों किलोमीटर तक बताई जाती है। यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और अत्याधुनिक नेविगेशन तथा मार्गदर्शन प्रणाली से लैस मानी जाती है। MIRV तकनीक के जुड़ने के बाद इसकी रणनीतिक ताकत और अधिक बढ़ गई है।
वैश्विक रणनीतिक संतुलन में बढ़ेगी भारत की भूमिका
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस परीक्षण के बाद भारत की सामरिक स्थिति और मजबूत होगी। अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और कुछ अन्य देशों के पास पहले से MIRV क्षमता मौजूद है। अब भारत भी इस तकनीक के सफल परीक्षण के साथ वैश्विक सामरिक शक्ति संतुलन में अधिक प्रभावशाली स्थिति में पहुंचता दिखाई दे रहा है।
आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को मिला बड़ा बल
विशेषज्ञों के अनुसार यह सफलता भारत के रक्षा अनुसंधान और स्वदेशी तकनीकी विकास की दिशा में बड़ा संकेत है। पिछले कुछ वर्षों में भारत लगातार अपनी मिसाइल और रक्षा प्रणालियों को आधुनिक बनाने पर जोर दे रहा है। मिशन दिव्यास्त्र को इसी रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।