दक्षिण-पश्चिम मानसून इस वर्ष देश के अनेक हिस्सों में सामान्य से अधिक सक्रिय रहा है, जिसके परिणामस्वरूप व्यापक जनधन हानि, बुनियादी ढांचे को नुकसान और सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त होने की स्थिति बनी हुई है। पूर्वोत्तर से लेकर उत्तर भारत और दक्षिणी राज्यों तक लगातार हो रही वर्षा ने प्रशासन के सामने राहत एवं बचाव कार्यों की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अनेक क्षेत्रों में नदियां खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर बह रही हैं, जबकि सड़कों, पुलों और सार्वजनिक सुविधाओं को भी व्यापक क्षति पहुंची है। मौसम विभाग की आगामी दिनों के लिए जारी चेतावनियों ने प्रशासनिक सतर्कता और बढ़ा दी है।
असम में बाढ़ का कहर, लाखों लोग संकट से जूझ रहे
असम में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। एक और व्यक्ति की मृत्यु के बाद राज्य में बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 98 हो गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राज्य में 1.55 लाख से अधिक लोग प्रत्यक्ष रूप से बाढ़ से प्रभावित हैं। पूर्वी असम के चार जिले सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं, जहां अनेक गांव अब भी जलमग्न हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभियान जारी है। प्रशासन ने राहत शिविरों की संख्या बढ़ाई है तथा खाद्य सामग्री, पेयजल, दवाइयों और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास तेज किए हैं। राज्य सरकार ने बाढ़ का पानी घटने के साथ ही व्यापक स्तर पर क्षति का आकलन प्रारंभ करने का निर्णय लिया है, ताकि पुनर्वास और मुआवजा प्रक्रिया को शीघ्र गति दी जा सके।
हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और बंद मार्गों ने बढ़ाई मुश्किलें
हिमाचल प्रदेश में लगातार मूसलधार वर्षा के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार 153 सड़कें अवरुद्ध हो चुकी हैं, जिससे अनेक गांवों और कस्बों का संपर्क प्रभावित हुआ है। कई क्षेत्रों में विद्युत और पेयजल आपूर्ति भी बाधित हुई है, जिसके कारण स्थानीय लोगों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। 30 जून को मानसून की शुरुआत के बाद से वर्षा संबंधी घटनाओं में राज्य में अब तक 65 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जिनमें 14 लोगों की जान भूस्खलन के कारण गई। प्रशासन सड़कें खोलने, मलबा हटाने और आवश्यक सेवाओं की बहाली के लिए लगातार कार्य कर रहा है, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
केरल और दिल्ली में भी बारिश ने बढ़ाई चुनौतिया
केरल में भारी वर्षा के कारण अनेक स्थानों पर घरों और सड़कों को नुकसान पहुंचा है। कई परिवार राहत शिविरों में रहने को विवश हैं, जबकि स्थानीय प्रशासन राहत एवं पुनर्वास कार्यों में जुटा हुआ है। दूसरी ओर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार चार दिनों तक हुई वर्षा ने अगस्त महीने का नया रिकॉर्ड बना दिया। शनिवार को 98.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो पिछले तीन वर्षों में अगस्त के दौरान एक दिन में हुई सर्वाधिक वर्षा है। महीने के शुरुआती आठ दिनों में ही कुल वर्षा का आंकड़ा सामान्य मासिक औसत के करीब पहुंच गया, जिससे कई इलाकों में जलभराव, यातायात बाधित होने और दैनिक गतिविधियों पर व्यापक प्रभाव देखने को मिला।
मौसम विभाग की चेतावनी, कई राज्यों में अभी और बरसेंगे बादल
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अनेक क्षेत्रों तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों पर वर्षा की संभावना व्यक्त की है। जम्मू-कश्मीर में भी 9 से 11 अगस्त के बीच व्यापक वर्षा और गरज के साथ भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। विशेष रूप से जम्मू संभाग के कुछ जिलों में अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। ओडिशा में बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से अगले पांच दिनों तक भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। वहीं हिमाचल प्रदेश के लिए सोमवार और मंगलवार को भारी से अत्यधिक भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जिससे प्रशासन ने आपदा प्रबंधन एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
बदलते मौसम के बीच आपदा प्रबंधन की बढ़ी जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती चरम मौसमी घटनाएं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की ओर स्पष्ट संकेत कर रही हैं। अत्यधिक वर्षा, अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाओं की आवृत्ति में वृद्धि ने आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक सक्षम बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को मजबूत करना, संवेदनशील क्षेत्रों में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना, शहरी जलनिकासी व्यवस्था में सुधार और नदी तटों पर दीर्घकालिक प्रबंधन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन अब पहले से अधिक आवश्यक हो गया है। विशेषज्ञ नागरिकों से भी अपील कर रहे हैं कि वे मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करें तथा अनावश्यक रूप से जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।
मानवीय राहत और पुनर्वास सबसे बड़ी प्राथमिकता
देश के विभिन्न राज्यों में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी हैं। राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में लोगों तक भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने में जुटी हैं। बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, क्षतिग्रस्त आधारभूत संरचना के पुनर्निर्माण और कृषि क्षेत्र को हुए नुकसान के आकलन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि मौसम सामान्य होने के बाद पुनर्निर्माण कार्यों को तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन जल्द से जल्द बहाल किया जा सके।