देश में जल संकट तेजी से गहराता दिख रहा है। कई राज्यों के प्रमुख बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर लगातार घट रहा है। केंद्रीय जल आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश के 166 बड़े जलाशयों में कुल जल भंडारण अब 34.45 प्रतिशत रह गया है। यह स्थिति गर्मी के बढ़ते असर और कमजोर प्री-मानसून बारिश के बीच चिंता बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मानसून कमजोर रहा तो आने वाले महीनों में पेयजल, सिंचाई और बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
दो हफ्ते में तेजी से घटा जल भंडारण
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक 30 अप्रैल तक देश के 166 जलाशयों में 71.082 अरब घन मीटर पानी था, जो कुल क्षमता का 38.72 प्रतिशत था। अब यह घटकर 63.232 अरब घन मीटर रह गया है, यानी केवल दो हफ्तों में करीब 8 अरब घन मीटर पानी कम हो गया। यह गिरावट गर्मी और बढ़ती मांग के बीच जल संकट की गंभीरता दिखा रही है।
इन राज्यों में हालात ज्यादा खराब
तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और तेलंगाना के कई जलाशयों में पानी आधे से भी कम रह गया है। तमिलनाडु के वैगई जलाशय में केवल 12.47 प्रतिशत और अलियार में 21.25 प्रतिशत पानी बचा है। केरल के पेरियार बांध में 41.65 प्रतिशत और कर्नाटक के तट्टिहल्ला जलाशय में 26.27 प्रतिशत पानी दर्ज किया गया है।
कुछ बांध पूरी तरह सूखे
बिहार का चंदन डैम, महाराष्ट्र का भीमा उज्जैनी और उत्तर प्रदेश का मौदाहा जलाशय पूरी तरह शून्य स्तर पर पहुंच गए हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश का माताटीला जलाशय 40.58 प्रतिशत पर रह गया है। मध्य प्रदेश के राजघाट डैम में 35.05 प्रतिशत और उत्तराखंड के टिहरी बांध में 20.85 प्रतिशत पानी बचा है।
नदी बेसिनों में भी गिरा स्तर
देश के प्रमुख नदी बेसिनों में भी जल भंडारण कम हुआ है। गंगा बेसिन 43.34 प्रतिशत, गोदावरी 36.52 प्रतिशत और नर्मदा 34.96 प्रतिशत पर है। कृष्णा बेसिन की स्थिति ज्यादा खराब है, जहां सिर्फ 19.31 प्रतिशत पानी बचा है। पूर्वोत्तर का बराक बेसिन भी 20 प्रतिशत से नीचे पहुंच गया है।
अल-नीनो बढ़ा रहा चिंता
अल-नीनो के असर को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। मौसम विभाग ने मानसून समय से पहले पहुंचने की संभावना जताई है, लेकिन अल-नीनो के कारण बारिश कमजोर पड़ सकती है। इसका सीधा असर जलाशयों के भराव पर पड़ेगा।
मई के अंत तक और बिगड़ सकते हैं हालात
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मई के अंत तक पर्याप्त प्री-मानसून बारिश नहीं हुई, तो कई राज्यों में पेयजल संकट बढ़ सकता है। सिंचाई प्रभावित होने से खेती पर असर पड़ेगा और जलविद्युत उत्पादन भी घट सकता है। केंद्रीय जल आयोग ने राज्यों को जल प्रबंधन पर सतर्क रहने की सलाह दी है।