नई दिल्ली - पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजे आने के बाद सियासी पारा लगातार हाई है। टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी अपनी हार को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं और उन्होंने इस्तीफा देने से साफ-साफ मना कर दिया। ममता ने कहा कि, मैं इस्तीफा नहीं दूंगी। मैं चाहती हूं कि यह काला दिन हो। ममता के इस जिद पर आम आदमी पार्टी के पूर्व सदस्य और कवि कुमार विश्वास की प्रतिक्रिया आई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मर्यादा का पालन किया जाना चाहिए।
लोकतंत्र में एक मर्यादा होती है
कवि कुमार विश्वास ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि, लोकतंत्र में एक मर्यादा होती है जिसका पालन किया जाना चाहिए। उनका मना करना काफी नहीं होगा। राज्यपाल सबसे ज्यादा विधायकों वाली पार्टी को आमंत्रित करेंगे। कुमार ने अपने बयान में आगे कहा कि, मुझे उम्मीद है कि वह आत्म-मंथन करेंगी। इस दौरान उन्होंने ममता बनर्जी को एक योद्धा बताया, लेकिन यह भी कहा कि दुर्भाग्य से, वामपंथ की जिन आसुरी शक्तियों से उन्होंने लड़ाई लड़ी थी, वे अंततः उनकी पार्टी में शामिल हो गईं।
कुमार विश्वास की बड़ी सलाह
इस दौरान कुमार विश्वास ने कहा कि, मैं नई सरकार को सतर्क रहने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि, जिन अवशेषों पर यह 'विजय ध्वज' फहराया गया है, उनका सम्मान किया जाए। कुमार ने कहा कि, जो लोग वामपंथ के साथ काम करते थे और फिर TMC में शामिल हो गए, उन्हें अपना वेश बदलकर यहां आने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। कवि ने आगे बोलते हुए कहा कि, अगर ऐसा होता है, तो बंगाल अपने दुखों से मुक्त नहीं हो पाएगा। मुझे उम्मीद है कि इसका पालन किया जाएगा।
जब अति हो जाती है तो उसकी वर्जना होती ही है
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों पर कवि कुमार विश्वास ने कहा कि, जब अति हो जाती है तो उसकी वर्जना होती ही है। आप बहुत बड़े समाज के हितों को, उनकी भावनाओं को अनवरत आहत करेंगे, अनवरत चोट पहुंचाएंगे और निरंकुश रूप से कार्य करेंगे, तो प्रजा इसी तरह से आपको दंड देती है। ये लगातार हम लोकतंत्र में देखते हैं। मैं स्वयं उसका भोगी हूं।