नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस की कृष्णानगर से लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने अपने संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अपनी याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक सहयोग नहीं मिलने के कारण उनके सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLAD) के तहत स्वीकृत करीब ₹3.5 करोड़ के विकास कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के दौरान कथित बाधाओं और उपद्रवी तत्वों द्वारा परेशान किए जाने का आरोप भी लगाया है। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में यह मामला “Mahua Moitra vs State of West Bengal”, W.P.(Crl.) No. 390/2026 के रूप में दर्ज है।
₹3.5 करोड़ के MPLAD कार्यों पर रोक का आरोप
महुआ मोइत्रा का कहना है कि कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र में MPLAD निधि से करीब ₹3.5 करोड़ के विकास कार्य प्रस्तावित किए गए थे, लेकिन संबंधित सरकारी अधिकारियों की ओर से जरूरी सहयोग और प्रक्रियात्मक कार्रवाई नहीं होने के कारण इन परियोजनाओं की प्रगति प्रभावित हुई है। याचिका में सांसद ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रशासनिक असहयोग के कारण उनके लिए अपने संसदीय क्षेत्र में जाकर जनता से संवाद करना और सांसद के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन करना मुश्किल हो रहा है। हालांकि, ये आरोप फिलहाल याचिका में किए गए दावे हैं और अदालत के अंतिम निष्कर्ष के रूप में इन्हें नहीं देखा जा सकता। मामले की सुनवाई में इन आरोपों पर आगे विचार होना है।
निर्वाचन क्षेत्र के दौरे और सुरक्षा को लेकर भी शिकायत
याचिका में महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि कृष्णानगर में उनके कार्यक्रमों और दौरों के दौरान पर्याप्त प्रशासनिक सहयोग नहीं मिलता। उन्होंने कथित तौर पर कुछ उपद्रवी तत्वों द्वारा उन्हें परेशान किए जाने और उनके कार्यक्रमों में व्यवधान पैदा करने की बात भी अदालत के सामने रखी है। यह मामला केवल MPLAD परियोजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सांसद की सुरक्षा और निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से काम करने के अधिकार से भी जुड़ा हुआ है।
तुषार मेहता ने सीधे सुप्रीम कोर्ट आने पर उठाया सवाल
बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा की ओर से पेश होने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन किसी अन्य अदालत में व्यस्त होने के कारण उपलब्ध नहीं थे। इसी दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस बात पर सवाल उठाया कि मामले से जुड़े घटनाक्रम पश्चिम बंगाल के क्षेत्राधिकार में होने के बावजूद याचिकाकर्ता सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचीं। मेहता ने दलील दी कि स्थानीय प्रशासन और राज्य में हुई घटनाओं से जुड़े तथ्यों की जांच के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट उपयुक्त मंच हो सकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में सीधे याचिका दायर किए जाने पर इसी आधार पर आपत्ति जताई।
पहले भी सुरक्षा को लेकर सामने आ चुके हैं विवाद
महुआ मोइत्रा ने इससे पहले भी अपने निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान कथित विरोध और सुरक्षा संबंधी घटनाओं को लेकर शिकायतें की हैं। उनके अनुसार, कुछ मौकों पर उनके कार्यक्रमों में बाधा डालने की कोशिश की गई। ताजा याचिका में इन घटनाओं के साथ-साथ MPLAD से जुड़े विकास कार्यों में कथित प्रशासनिक अड़चन को भी उठाया गया है। अब मामले में सुप्रीम कोर्ट आगे किस तरह कार्यवाही करता है और क्या याचिका पर सीधे सुनवाई होगी या संबंधित पक्ष को हाईकोर्ट का रुख करने को कहा जाएगा, यह आगे की सुनवाई में स्पष्ट होगा।