नई दिल्ली: भारत में हर साल 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day) मनाया जाता है। यह दिन देश के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। सरदार पटेल को उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और देश की रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए 'लौह पुरुष' के नाम से जाना जाता है। आजादी के बाद जब भारत कई छोटी-बड़ी रियासतों में बंटा हुआ था, तब उन्हें एकजुट कर अखंड भारत के निर्माण में सरदार पटेल ने अहम योगदान दिया। उनके इसी योगदान को याद करने और देशवासियों को एकता, अखंडता और भाईचारे का संदेश देने के लिए हर साल राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है।
क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय एकता दिवस?
राष्ट्रीय एकता दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों में एकता, भाईचारे और राष्ट्रीय अखंडता की भावना को मजबूत करना है।भारत विभिन्न धर्मों, भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं वाला देश है। यहां अलग-अलग पहचान होने के बावजूद सभी नागरिक एक भारतीय के रूप में जुड़े हुए हैं।सरदार वल्लभभाई पटेल ने आजादी के बाद देश की सैकड़ों रियासतों को भारतीय संघ में शामिल कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके प्रयासों से भारत की एकता को मजबूती मिली।इसी योगदान को याद करते हुए उनकी जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। यह दिन लोगों को देश की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है।
राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरुआत कब हुई?
भारत सरकार ने साल 2014 में पहली बार 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की थी।तत्कालीन सरकार ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था। इसके बाद हर साल 31 अक्टूबर को देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाने लगे।
'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' पहल से भी जुड़ा है यह दिन
साल 2015 में सरदार पटेल की 140वीं जयंती के अवसर पर 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' पहल की शुरुआत की गई थी।इस पहल का उद्देश्य देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों के बीच आपसी समझ, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और संबंधों को मजबूत करना है।इसके तहत अलग-अलग राज्यों की भाषा, खानपान, संस्कृति और परंपराओं को जानने और समझने के अवसर दिए जाते हैं, ताकि देश के लोगों के बीच आपसी जुड़ाव बढ़ सके।
राष्ट्रीय एकता दिवस का क्या है महत्व?
राष्ट्रीय एकता दिवस हमें याद दिलाता है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता और एकजुटता है।
इस दिन का महत्व कई मायनों में खास है
राष्ट्रीय एकता का संदेश: देश के नागरिकों को एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए प्रेरित करना।
सरदार पटेल को श्रद्धांजलि: देश की रियासतों के एकीकरण में उनके योगदान को याद करना।
भाईचारे को बढ़ावा: अलग-अलग धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोगों के बीच आपसी सद्भाव बढ़ाना।
देश के प्रति जिम्मेदारी: नागरिकों को राष्ट्र की सुरक्षा और एकता के प्रति जागरूक करना।
युवाओं को प्रेरणा: नई पीढ़ी को देश की एकता और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करना।
राष्ट्रीय एकता दिवस पर आयोजित होती है 'रन फॉर यूनिटी'
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर देशभर में 'रन फॉर यूनिटी' यानी एकता दौड़ का आयोजन किया जाता है।इसमें स्कूली छात्र, युवा, सरकारी कर्मचारी, पुलिसकर्मी और आम नागरिक हिस्सा लेते हैं। इस दौड़ का उद्देश्य लोगों को एकता और भाईचारे के संदेश से जोड़ना है।इसके अलावा देशभर में राष्ट्रीय एकता की शपथ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, जागरूकता अभियान और अन्य आयोजन भी किए जाते हैं।
कौन थे सरदार वल्लभभाई पटेल?
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। वे स्वतंत्र भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने।आजादी के बाद देश की 500 से अधिक रियासतों को भारतीय संघ में शामिल कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी राजनीतिक दृढ़ता और प्रशासनिक नेतृत्व के कारण उन्हें 'भारत का लौह पुरुष' कहा जाता है।31 अक्टूबर को उनकी जयंती मनाकर देश उनके राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को याद करता है।